‘‘इंडिया’’ शब्द या नाम अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ‘इंडिया’ नाम का इतिहास बहुत पुराना है और यह दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक से जुड़ा हुआ है। इस नाम का उपयोग सदियों से इस क्षेत्र और इसके लोगों को संदर्भित करने के लिए किया जाता रहा है। इस नाम को बनाए रखने से ऐतिहासिक निरंतरता और सांस्कृतिक पहचान की भावना सुनिश्चित होती है। ‘‘इंडिया’’ नाम देश के भीतर विविध संस्कृतियों के लिए एक एकीकृत कारक के रूप में कार्य करता है।
भारत एक बहु-जातीय, बहुभाषी और बहु-धार्मिक राष्ट्र है और ‘‘इंडिया’’ नाम इसके नागरिकों के बीच साझा पहचान और एकता की भावना प्रदान करता है। इंडिया नाम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता प्राप्त है। यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों, राजनयिक बातचीत और विभिन्न वैश्विक प्लेटफार्मों में उपयोग किया जाने वाला आधिकारिक नाम है।
नाम बदलने की प्रक्रिया होगी जटिल
इंडिया नाम देश के संविधान और कानूनी दस्तावेजों में निहित है। नाम बदलने के लिए जटिल कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी, जिसे लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा। इंडिया नाम देश के लिए एक ब्रांड बन गया है, जो इसकी समृद्ध संस्कृति, विरासत और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है। यह पर्यटन को बढ़ावा देने और दुनियाभर से पर्यटकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इंडिया ने विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सदियों से व्यापार, संस्कृति और ज्ञान का केंद्र रहा है। इंडिया नाम अपने साथ यह ऐतिहासिक और वैश्विक प्रभाव रखता है। कुल मिलाकर, ‘‘इंडिया’’ नाम देश के लिए घरेलू और अंतरारष्ट्रीय स्तर पर बहुत महत्व रखता है, क्योंकि यह इसके समृद्ध इतिहास, विविध संस्कृति और वैश्विक समुदाय में अद्वितीय पहचान को समाहित करता है।
यह सही है कि अंग्रेजों ने भारत पर शासन करने के लिए इंडिया शब्द का प्रयोग किया है। फिर भी इसे अंग्रेजों की देन या थोपा गया नाम नहीं कहा जा सकता है। इतिहास के पन्ने टटोलें तो सिंधु नदी का दूसरा नाम इंडस भी था। इस नदी के किनारे विकसित सभ्यता इंडस वैली सिविलाइजेशन कहलाई। सिंधु नदी का इंडस नाम भारत आए विदेशियों ने रखा। सिंधु सभ्यता के कारण भारत का पुराना नाम सिंधु भी था, जिसे यूनानी में इंडो या इंडस भी कहा जाता था।
जब ये शब्द लैटिन भाषा में पहुंचा तो बदलकर इंडिया हो गया। मौर्य काल में मेगस्थनीज द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘‘इंडिका’’ भी इस बात का प्रमाण है कि इंडिया शब्द अपने आप में भारत का प्राचीन नाम है और इसे अंग्रेजों ने भारत पर नहीं थोपा था। दुनिया के लोग भारत को इंडिया के नाम से ही जानते थे।
विपक्षियों के गठबंधन के इंडिया नाम से विचलित हो कर इस शब्द को संविधान से हटाने पर सरकार को स्वयं असहज स्थिति का सामना करना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब तक कम से कम 135 जनकल्याणकारी और प्रगतिशील योजनाएं शुरू कर चुके हैं जिनके लाभ देश को मिल रहे हैं। ऐसी कम से कम एक दर्जन योजनां इंडिया के नाम से चल रही हैं जिनमें मेक इन इंडिया, खेलो इंडिया, फेम इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और डिजिटल इंडिया आदि शामिल हैं।
ये योजनाएं सीधे जनता से जुड़ी हैं इसलिए नाम बदलने का स्पष्टीकरण सीधे जनता को देना पड़ेगा। वैसे भी विपक्षी दलों के गठबंधन बनते बिगड़ते रहते हैं। उनके नाम भी बदलते रहते हैं। बनते बिगड़ते राजनीतिक नामों के साथ देश के नाम भी बदलते रहना कितना तर्कसंगत होगा, यह देश की जनता ही तय करेगी।
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