परिवर्तन की कठिन प्रक्रिया को फिल्म निर्देशक स्टीफन फ्रियर्स ने अपनी फिल्म ‘द क्वीन’ में बहुत खूबसूरती और संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया है। फिल्म में एक ओर नए-नए चुन कर आए ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर नई हवा, प्रगति, परिवर्तन के प्रतीक हैं। वहीं दूसरी ओर 55 साल के लंबे समय से शासन करती ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ब्रिटिश राजघराने की परम्परा का प्रतिनिधित्व करती हैं। सारी फिल्म प्रिंसेस डायना की मृत्यु के बाद कुल एक सप्ताह की हलचल के इर्द-गिर्द बुनी गई है और अधिकतर काम उस काल की वास्तविक फिल्म फुटेज के द्वारा चलाया गय है। इसके बावजूद यह डॉक्युमेंट्री न हो कर एक फीचर फिल्म है, इसे बायोपिक की संज्ञा भी दी जा सकती है।
प्रिंसेस ऑफ वेल्स, डायना की कार दुर्घटना में मृत्यु के बाद एक सप्ताह तक जो कुछ भी हुआ, वह इस महारानी के राज्यकाल का सर्वाधिक कठिन काल था। इस पूरी फिल्म का केंद्र है, अभिनेत्री हेलेन मिरेन का लाजवाब अभिनय।
फिल्मों-टेलीविजन में की भूमिकाएं
1945 में जन्मी स्वभाव से आशावादी यह ब्रिटिश अभिनेत्री काफी समय से मंच पर सक्रिय रही है, साथ ही फिल्मों एवं टेलीविजन में भी इसने प्रसिद्धि पाई है। स्कूली दिनों से नाटकों में भाग लेती मिरेन जल्द ही रॉयल शेक्सपीयर कंपनी हिस्सा बन गई। उसने पीटर ब्रूक के साथ भी काम किया। उसकी अभिनय की पेशेगत कुशलताओं को पहचाना गया, इसीलिए उसे ओफीलिया, लेडी मेकबेथ, डचेच ऑफ मेल्फी आदि की भूमिकाएं मिली। उसने इन भूमिकाओं को इस कुशलता से निभाया कि दर्शकों और समीक्षकों दोनों की प्रशंसा की भागीदार बनी।
अन्य कई प्रोग्राम के साथ टेलिविजन पर उसने एक लंबी पारी (1990 से 2006) ‘प्राइम सस्पेक्ट’ में डिडेक्टिव जेन टेनीसन के रूप में खेली है। ‘द कुक’, ‘द थीफ’, ‘हिज वाइफ’, ‘द मैडनेस ऑफ किंग जॉर्ज (इसके लिए उसे सर्वोत्तम अभिनेत्री का पुरस्कार मिला), ‘सम मदर्स सन’, ‘क्रिटिकल केयर’, ‘कैलेंडर गर्ल्स’ आदि उसकी अन्य फिल्में हैं। 2006 में फिल्म ‘द क्वीन’ में अभिनय के लिए उसे बेस्ट एक्ट्रेस का एकेडमी अवॉर्ड मिला।
क्वीन की भूमिका के विषय में स्वयं हेलेन मिरेन का कहना है कि यह उनके लिए स्वाभाविक था, एक बार विग और ग्लासेस लगाते वे स्वयं को महारानी के मुखौटे के भीतर पातीं। यह अच्छी बात है कि उनके चेहरे की भाव-भंगिमा अनायास साम्राज्ञी से मिलती-जुलती है। इस भूमिका के लिए उन्होंने एलीजाबेथ की फिल्म और वीडियो फुटेज को बार-बार देखा और पूरे प्रोडक्शन के दौरान उनका फोटोग्राफ अपने सामने रखा।
महारानी के टेलीविजन भाषणों से स्वर की साम्यता बनाए रखने के लिए उन्होंने बोलने का विशेष प्रशिक्षण लिया।
उनके अभिनय की प्रशंसा करते हुए महारानी ने उन्हें बंकिंघम पैलेस में डिनर पर आमंत्रित किया, यह अलग बात है कि वे अपनी शूटिंग्स के कारण इसमें न जा सकीं। हेलेन मिरेन को अवश्य यह भूमिका करके गर्व और संतोष हुआ होगा। इस भूमिका के लिए उन्हें ढेरों नोमीनेशन्स मिले और 29 प्रमुख सम्मान प्राप्त हुए।
पुरस्कार ग्रहण करते हुए अधिकांश अवसरों पर उन्होंने वास्तविक महारानी के प्रति अपनी सराहना और श्रद्धा व्यक्त की। साथ ही अपना गोल्डेन ग्लोब तथा ऑस्कर अवॉर्ड महारानी एलिजाबेथ को समर्पित कर दिया। इस भूमिका के लिए दर्शकों ने भी उनके प्रति सम्मान दिखाया। वेनिस फिल्म फेस्टिवल में फिल्म समाप्त होने पर दर्शकों ने पांच मिनट खड़े तालियों के साथ उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट किया।
किसी जीवित व्यक्ति, वह भी किसी प्रसिद्ध व्यक्ति- साम्राज्ञी का चरित्र निभाना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन हेलेन मिरेन ने यह काम कमाल की विशिष्टता के साथ किया है। एकांत में अपनी भावनाओं को बहते देने और डायना के अंतिम संस्कार के समय उसके भाई की प्रसिद्ध स्पीच के समय मिरेन का अभिनय कमाल का है। क्वीन के रूप में हेलेन मिरेन हर फ्रेम में विशिष्ट है।
एक प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक रोजर एबर्ट (फिल्म के विषय में जिनकी की मैं कायल हूं) ने इस फिल्म को ‘स्पेलबाइंडिंग’ कहा है।
हेलेन मिरेन का पूरा नाम हेलेन लिडिया मिरिओनॉफ और पुकारू नाम पोपर है। मां का नाम कैथलीन और पिता का नाम वैसिली पेट्रोविच मीरोनोव है। हेलेन के पति का नाम टेलर हैकफोर्ड है। एक ऑस्कर के साथ अब तक उनके पास 130 और पुरस्कार हैं। उनकी एक और प्रसिद्ध फिल्म है, ‘हिचकॉक’, 2012 की इस फिल्म में उन्होंने हिचकॉक की पत्नी एल्मा की भूमिका की है।
फिल्म एक खास काल को समेटती है और पति-पत्नी के रिश्ते को दिखाती है। यह काल है, कालजयी फिल्म ‘साइको’ के फिल्मांकन अर्थात 1959-1960 का। निर्देशक साशा जेरवासी ने इस डेढ़ घंटे से कुछ ऊपर की फिल्म में हेलेन मिरेन के अलावा एन्थॉनी होप्किन्स, स्कारलेट जॉनसन को लिया है।