बिहार सरकार के लाठीतंत्र पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं पर गुरुवार को जो हुआ उसने सभी सीमाओं को तोड़ दिया।
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सैकड़ों वीडियो और टीवी के लाइव फुटेज मौजूद हैं जिसमें बिहार पुलिस की बर्बरता को नजदीक से देखा जा सकता है। नीतीश सरकार में यह लाठीचार्ज की कोई पहली घटना नहीं है। एक दिन पहले बुधवार 12 जुलाई को भी किसान सलाहकारों के ऊपर नीतीश कुमार की पुलिस ने जमकर लाठियां चलाई थी। पुलिस वालों ने लोगों को सड़क पर गिरा-गिराकर लाठियां बरसाईं। लाठीचार्ज में कई लोग घायल हुए थे। महिलाओं को भी चोटें आई थी।
आंकड़ों की बात करें तो पिछले कुछ सालों में करीब 12 से अधिक बार बिहार के युवाओं को दौड़ा-दौड़ा कर लाठी से पीटा गया है। अभ्यर्थी जब भी अपनी मांगों को लेकर पटना में प्रदर्शन करने पहुंचते हैं पटना पुलिस लाठियों से स्वागत करती है। इसी महीने एक जुलाई को पटना पुलिस ने शिक्षक अभ्यर्थियों पर एक दो बार नहीं बल्कि चार-चार बार लाठी बरसाई थी। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो पुलिस की बर्बरता बयां करने को काफी है।
गुरुवार 13 जुलाई को दूसरी बार पटना पुलिस ने सभी हदों को पार किया। इससे पहले 22 अगस्त 2022 को दरभंगा से पटना आए शिक्षक अभ्यर्थी को इतना पीटा गया था कि उसकी हालत गंभीर हो गई। अभ्यर्थी हाथ में तिरंगा लिए था, पर उसे पीटते-पीटते अधमरा कर दिया गया। पिटाई का वीडियो वायरल होने पर देश भर में गुस्से की लहर दौड़ गई थी। लाठी भांजने वाले एडीएम पर कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन हद तो यह कि वह लाठीबाज एडीएम तरक्की पा गया। उधर, आज भी वह अभ्यर्थी अपने पैरों पर ठीक से खड़ा नहीं हो सका है।
बिहार सरकार के लाठीतंत्र पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं पर गुरुवार को जो हुआ उसने सभी सीमाओं को तोड़ दिया। बिहार को लाठीतंत्र के रूप में बड़ा मुद्दा मिल गया है। नीतीश कुमार सरकार से सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या हर मांग का जवाब लाठी से ही दिया जाएगा? अगर बात लाठी की है तो जवाब चुनाव में वोट से मिलने की बात जोर शोर से उठने लगी है।
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