दिल्ली विश्वविद्यालय के मैत्रेयी कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही डॉ मोनिका कौशिक की इस रोमांचक यात्रा की शुरुआत हुई। वनस्पति विज्ञान (बॉटनी) में बीएससी की पढ़ाई करते समय, उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वन्यजीव जीव विज्ञान (वाइल्डलाइफ बायोलॉजी) और पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) उनके संभावित कैरियर विकल्प बन सकते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में ही पर्यावरण जीव विज्ञान (एनवायर्नमेंटल बायोलॉजी) में परास्नातक डिग्री हासिल करने के दौरान ही उनके सामने इससे छिपी संभावनाएं सामने आई। समुदाय पारिस्थितिकी (कम्युनिटी इकोलॉजी) और वन्यजीव जीव विज्ञान के पाठ्यक्रमों ने उनके लिए एक नया संसार उजागर कर दिया, जिसने पारंपरिक कक्षाओं की सीमाओं को पार करते हुए उनके अंदर एक जुनून पैदा किया।
यही जुनून अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, चंबल वन्यजीव अभयारण्य की एक फील्ड ट्रिप के दौरान। वहां घड़ियालों के लिए चलाए जा रहे मनमोहक संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम (कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम) ने उनके ऊपर एक अमिट छाप छोड़ी। स्थानीय जैव विविधता पहलों में सक्रिय भागीदारी के साथ यह अनुभव उनके जुनून को और उत्तेजित करने लगा, जो अब पारंपरिक शिक्षा की सीमाओं से बहुत आगे निकल चुका था। उन्हें अब समझ आने लगा था कि वन्यजीव जीव विज्ञान सिर्फ जंगली जानवरों की तस्वीरें लेने के बारे में नहीं है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्रों के भीतर जटिल संबंधों को समझने के बारे में भी है।
महत्वपूर्ण क्षण: लैंटाना और एवियन बीज फैलाव की गतिशीलता की खोज
स्नातकोत्तर अध्ययन के वर्षों में, खासकर वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में पीएचडी के दौरान, उनकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने कर्नाटक में एक इंटर्नशिप के लिए अशोक ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट (एटीआरई) से डॉ. अंकिला हिरेमथ से संपर्क किया। डॉ. हिरेमथ ने उनका अपने एक प्रोजेक्ट में स्वागत किया, जो बिलीगिरी रंगा स्वामी मंदिर वन्यजीव अभयारण्य में लैंटाना की गतिशीलता पर केंद्रित था।
यह इंटर्नशिप लैंटाना (लैंटाना एक ऐसा सुन्दर पौधा है जो देखने जितना मनमोहक है उतना ही हानिकारक भी है पशुओं के लिए), देशी पक्षी समुदायों और पक्षियों द्वारा बीज फैलाने के संबंधों पर केंद्रित थी। उनका विशेष ध्यान लैंटाना के देशी फलदार पौधों के बीज फैलाने पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने पर था, जिसने क्षेत्र में उनके निरंतर प्रयासों की नींव रखी थी।
चुनौतियों से निपटना, एक यात्रा
बीते सालों को याद करते हुए, वे खुलकर उन चुनौतियों के बारे में बताती हैं जिनका सामना उन्हें करना पड़ा। वर्ष 2007-2008 के दौरान विश्वविद्यालय में एक मुख्य बाधा थी मार्गदर्शकों की कमी। वन्यजीव जीवविज्ञान उस समय लोकप्रिय विकल्प नहीं था, ज्यादातर छात्र वनस्पति विज्ञान, प्राणि विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी जैसे परंपरागत पाठ्यक्रमों को चुनते थे। गनीमत रही कि डॉ. अखिला हिरेमठ से परिचय होने से उन्हें पारिस्थितिक अनुसंधान में बहुमूल्य जानकारी मिली, जिसने उन्हें इस क्षेत्र की जटिलताओं को समझने में मार्गदर्शन दिया।
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपनी इंटर्नशिप के बारे में साझा किया जिसके दौरान उन्हें अलग राज्य में इंटर्नशिप करने का मौका मिला। उनका परिवार ज्यादा पढ़ा लिखा न होने के बावजूद शिक्षा की महत्वता को भली भाँति समझता था, उनके पिताजी हमेशा से चाहते थे की उनकी बेटी डॉक्टर बने और अपने सपनो को पूरा करे और यही जूनून डॉ मोनिका में भी था इसीलिए सारी बाधाओं को पार करके अपने सपने को पूरा भी किया।
इन सब के बावजूद अपने परिवार को समझाना उनके लिए कोई आसान काम नहीं था, विशेषकर ऐसी फील्ड के लिए राज़ी करना जहाँ जंगली जानवर तो थे ही साथ में कम महिलाओ का होना भी एक चिंता का कारण बना हुआ था। डॉ मोनिका बताती है कि उनके परिवार की चिंता तब दूर हुई जब उन्हें यह बताया गया कि उन्हें एक महिला सलाहकार सहित अन्य शोधकर्ताओं के साथ बेस कैंप में तैनात किया जाएगा।
शुरुआत के दिनों में उन्हें वन अधिकारियों के फ्रंटलाइन कर्मचारियों का रुखा व्यव्हार देखने को मिला लेकिन उनके लिए फ्रंटलाइन कर्मचारियों से मान्यता प्राप्त करना प्राथमिक लक्ष्य नहीं था। उनके दिमाग बस इस बात पर केंद्रित था कि कैसे उन्हें चुनौतियों के बावजूद अपना काम पूरा करना है। यही दृष्टिकोण जंगल की जटिलताओं से निपटने और सौंपे गए कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। उत्तराखंड में भी काम करने के दौरान कई चुनौतियां सामने आईं।
खासकर, जब वह क्षेत्र में अकेली महिला शोधकर्ता के रूप में होती थीं, तो सुरक्षा को लेकर उनकी चिंताएं और बढ़ जाती थीं। एक घटना को साझा करती हुई बताया कि एक रात जब कुछ नशे में धुत बाहरी लोगों ने उनके कमरे में घुसने की कोशिश की। इस घटना ने उन्हें अपने क्षेत्र अनुसंधान के तरीकों का पुनर्मूल्यांकन करने और अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया।
जुनून और पूर्ति: वन्यजीव जीव विज्ञान के लिए उनका गहरा प्रेम
जैसा कि इंटरव्यू आगे बढ़ता है, वन्यजीव जीवविज्ञान के प्रति उनका जुनून साफ झलकता है। जंगल की अविश्वसनीय प्रजातियों से घिरे, जंगल में डूब जाने का आनंद ही उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। एक शहर की लड़की से जंगल के वातावरण को अपनाने तक का सफर तय करते हुए, उन्हें जंगल में बिताया हर दिन शांति और अद्वितीय सीखने का अनुभव प्रदान करता है। बीआरटी में फील्डवर्क के दौरान एक हाथी के साथ हुआ एक प्रारंभिक अनुभव उनकी स्मृति में अमिट छाप छोड़ गया।
शुरू में हाथियों को शांत और सौम्य समझने वाली उन्हें अपने फील्ड असिस्टेंट ने उनकी असली प्रकृति से अवगत कराया, जिसने उन्हें इन जानवरो से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। जंगल जो स्वतंत्रता का एहसास देता है, वह सबसे अलग है, जो उन्हें अपने काम में निर्णय लेने का अधिकार देता है।
यह सफर भूमिकाओं के एक क्रम के साथ सामने आता है- पर्यवेक्षकों और गुरुओं के मार्गदर्शन में रहने से लेकर स्वतंत्र निर्णय लेने वाली एक आत्मनिर्भर और निडर महिला बनने तक। वह साझा करती हैं की छात्रों से लेकर वन अधिकारियों तक विविध दर्शकों को पक्षी दिखाने का सरल सा लगने वाला कार्य गहरा महत्व रखता है। यह क्रिया लोगों को प्रकृति के साथ फिर से जोड़ने, जैवप्रेम की भावना को बढ़ावा देने और पर्यावरण के साथ जन्मजात संबंध को समझने के लिए एक सेतु का काम करती है।
वर्तमान कार्य: शहरी हरित स्थानों के रहस्यों को उजागर करना
वर्तमान शोध में, वह इस बात का को समझना चाहती है कि कैसे शहरी हरे स्थान, जैसे कि शहर के पार्क और आवासीय क्षेत्र, पक्षियों के संरक्षण में मदद करते हैं। वह देहरादून पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है जहां तेजी से शहरीकरण और हरे स्थानों की कमी ने पक्षियों की आबादी को प्रभावित किया है। मेरे शोध का उद्देश्य हरे स्थानों की विशेषताओं को समझना है जो पक्षियों की समृद्धि का समर्थन करते हैं।
बड़े हरे स्थानों में अधिक पक्षियों, विशेषकर देशी पेड़ों को आश्रय मिलता है। मैं यह भी अध्ययन कर रही हूं कि शोर के स्तर कैसे पक्षियों की समृद्धि पर प्रभाव डालता है, साथ ही बिल्लियों और कुत्तों जैसे गैर-देशी शिकारियों का क्या प्रभाव होता है। अंततः, मेरा शोध शहरी पक्षियों की आबादी को बनाए रखने के लिए कार्यात्मक हरे स्थानों की संरक्षित करने के महत्व को रेखांकित करता है।
सीमाओं को छोड़कर स्वतंत्रता की ओर
जंगल के हरे-भरे विस्तार में कदम रखते हुए, उन्होंने खुद को एक शहरी दुनिया से पूरी तरह से अलग दुनिया में घिरा हुआ पाया। इस यात्रा ने उनके दृष्टिकोण को हमेशा के लिए बदल दिया। विशाल वृक्षों और वन्य जीवन की स्वर लहरियों से घिरे हुए, उन्होंने एक अद्वितीय अनुभव की यात्रा की। जंगल के बारे में सीमित जानकारी रखने वाली शहरी लड़की के रूप में, प्रत्येक जीव की मुलाकात ने उन्हें आश्चर्यचकित किया। यहाँ तक कि जंगल के प्राणियों के साथ हुई प्रत्येक मुलाकात ने उनके अंदर नई ऊर्जा का संचार किया। इसके बावजूद, यह सिर्फ
प्रकृति की सुंदरता नहीं थी जिसने उन्हें मोहित किया; यह उस स्वतंत्रता और सशक्तीकरण की गहन भावना थी जो उनके अंदर इस इलाके में भ्रमण के साथ आई। घने पत्तों के बीच, उन्होंने खुद पाया की वे अपनी सुविधा से भरी सभी सीमाओं को तोड़ रही हैं, जंगल की चुनौतियों को स्वीकार कर रही हैं और अपना रास्ता खुद बना रही हैं। ये कहानी हर उस महिला को प्रेरित करती हैं जो हर चुनौती का सामना करके अपने सपनो को पूरा करने से पीछे नहीं हटेगी और खुद अपनी सीमाएं तय करने में सक्षम होगी।
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