बजाज बॉक्सर के रूप में इकोनॉमिक रेंज में शानदार माइलेज और कम से कम मेंटेनेंस के साथ बाइक के क्षेत्र में क्रांति की थी बजाज ऑटो ने।
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पापा अब भी सिखाने में टालमटोल कर रहे थे और एक दिन मेरे सब्र का बांध टूट गया। मैंने पापा से चाबी मांगी और कहा- आज मैं खुद ही चला लूंगी, आप रहने दीजिए। पापा को लगा मैं मजाक कर रही हूं लेकिन उनके साथ स्कूटर पर आते-जाते मैं इतना तो सीख गई थी कि इसे चलाना कैसे है। बस चाबी लगाई, किक मारी और पहली बार वही हुआ जो अमूमन सबके साथ होता है। स्कूटर का पहला गियर डालते ही झटके से क्लच छोड़ा और स्कूटर घोड़े की तरह उछलकर बंद हो गया। पास से गुजरते एक अंकल ने समझाइश दी, बेटा क्लच धीरे-धीरे छोड़ो।
तीसरी बार में मैं पहले गियर में स्कूटर को चलाकर एक छोटा चक्कर लगा लाई और फिर पापा को मुझे स्कूटर सिखाने पर मजबूर होना पड़ा। इश्क की ये जीत मेरे खाते में दर्ज हो गई। हालांकि इसके पहले पापा की शर्तें भी थीं कि पहले स्टेपनी चेंज करना और प्लग साफ करना सीखना होगा, तब स्कूटर सिखाया जाएगा और मैं खुशी-खुशी इसके लिए तैयार हो गई।
स्टार्ट न होने पर स्कूटर को एक बार झुकाकर स्टार्ट करने की वो टैक्नीक ठीक वैसी ही थी जैसे आज कम्प्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल के लिए एक अल्टीमेट तरीका स्विच ऑफ करके स्विच ऑन करने की है। 90 प्रतिशत मामलों में ये काम करती ही है।
बजाज सुपर की वह उड़ान सालों साल मेरे साथ रही। उस टू सीटर पर मैंने तीन लोगों को बैठाया। उस जमाने में जब लड़कियों के लिए छोटे स्कूटर्स ही वाजिब माने जाते थे मुझे बजाज स्कूटर चलाने वाली लड़की के रूप में पहचान मिली रही सालों और फिर एक दिन पापा ने इस ख्याति को और बढ़ाते हुए मुझे गिफ्ट की "बजाज बॉक्सर सीटी 100" बाइक। ये कई मामलों में एक क्रांतिकारी कदम था। उस जमाने मे कॉलेज बाइक से जाने वाली मैं अकेली लड़की थी और आज भी वो बजाज बॉक्सर मेरी सच्ची साथी है।
बजाज बॉक्सर के रूप में इकोनॉमिक रेंज में शानदार माइलेज और कम से कम मेंटेनेंस के साथ बाइक के क्षेत्र में क्रांति की थी बजाज ऑटो ने। उस समय लगभग हर मिडिल क्लास घर मे बजाज की बाइक्स आम थीं। यहां तक कि मेरी देखा देखी मेरे कई फ्रेंड्स ने वो बाइक खरीदी। आज 18 सालों से बिना सेल्फ स्टार्ट, बिना किसी फेयरिंग या अन्य सजावट के मेरी बजाज बॉक्सर मुझे बिना पंखों के आसमान पर उड़ने जैसी फीलिंग देती है।
राहुल बजाज के रूप में उस एक पीढ़ी को पंख देने वाले युग का भी अंत हुआ है। आने वाले दिनों में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कई इनोवेशन होते रहेंगे। बजाज भी और गाड़ियां बनाएगा लेकिन उस स्कूटर से जुड़ी वो यादें और इमोशंस हमेशा के लिए एक-दूसरे के पूरक बने रहेंगे।
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