सारस क्रेन न केवल भारतीय, बल्कि दुनिया के कई देशों जैसे की नेपाल, विएतनाम, चीन, कोम्बोडिया की संस्कृति में उल्लेखित है और इन्हें प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
- फोटो : फोटो: राहुल सिंह
हमारे बचपन में सारस
बचपन में जब भी हम गर्मियों की छुट्टियों में परिवार सहित कहीं घूमने निकलते तो रेलगाड़ी से सफर किया करते। खिड़की के बाहर हरे-भरे खेतों को निहारते समय बहुत से सारस पक्षी हमें दिखाई देते, और मैं और मेरी बेहने इनकी गिनती किया करती थीं।
हमारे दादा दादी के खेतों में ये पक्षी सावन के महीनों में जोर से पुकारते और नाचते हुए आम दिखाई दिया करते थे। कभी-कभी फसलों के बीच इनके घोसले मिलने पर हम उस पूरे इलाके की निगरानी करते ताकि कोई भी उनके अंडों या बच्चों को परेशान ना करे।
क्या बच्चों में प्रकृति की तरफ कुदरती प्रेम होता है? और अगर ये सच है तो फिर ये प्रेम, उदासीनता में कब और कैसे परिवर्तित हो जाता है? यह गंभीरता से सोचने की बात है।
भारत में शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो जहां फसलों के उत्पादन में कीटनाशकों का इस्तेमाल न किया जाता हो। नतीजतन, कीटनाशकों का प्रयोग और इनके प्राकृतिक आवास का विनाश इस उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
गोंडी जनजाति के लोग सारस क्रेन को पवित्र मानते हैं (बर्डलाइफ इंटरनेशनल, 2001)।
- फोटो : फोटो: राहुल सिंह
शायद हम इस कल्पना में रहते हैं कि यह सारस हमारे बीच हमेशा रहेंगे और उनकी आवाज जंगलों और खेतों में रोज गूंजेगी। यह मुझे 60 के दशक के आविष्कारक और रेडियो पायनियर, गुग्लिएल्मो मार्कोनी की अद्भुत कहानी की याद दिलाता है। मार्कोनी का यह विश्वास था की वह एक ऐसा उपकरण बनाएंगे जिससे वह बीते हुए समय की ध्वनियां एक बार फिर सुन सकेंगे।
मार्कोनी को यकीन हो गया कि ध्वनियां कभी नहीं मरती। कितना मनमोहक हो अगर मोजार्ट्स की फर्स्ट सिम्फनी, अपने प्रेमी के प्यार का पहला इजहार, अपने बच्चे की पहली हंसी की आवाज को हम दोबारा सुन सकें और वे सभी बेशकीमती यादें, हमेशा के लिए इन आवाजों में सीटें हुई रहें।
लेकिन जैसा हम जानते हैं, यह एक व्यर्थ सपना था और यह सभी ध्वनियाँ चाहे हमें कितनी भी प्रिय हों, समय के विस्तार में हमेशा के लिए खो जाती हैं। और यही वास्तविकता से मुझे डर लगता है की कहीं इन सारस के गीत, इनके विलुप्त होने पर बस सिफ हमारी यादों में ही ना गूंजती रह जाए।
नोट: राधिका भगत एक वन्यजीव संरक्षणवादी हैं जिन्होंने पिछले एक दशक में भारत और पड़ोसी देशों में विभिन्न संरक्षण मुद्दों पर काम किया है। वह एक आध्यात्मिक साधक, योग शिक्षक भी हैं।
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