इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव में लग रहा है कि राजद और जनता दल (यू) साथ मिलकर बिहार में चुनाव लड़ेंगे। दोनों का गठबंधन भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने से इन दोनों पार्टियों का एक बड़ा वोट शेयर भाजपा की तरफ आ सकता है, यह अब साफ-साफ दिख रहा है।
बिहार में पिछड़ों की राजनीति को लेकर पहले ही भाजपा और विपक्षी दलों में राजनीति तेज हो गई है। कर्पूरी ठाकुर की विरासत को हासिल करने के लिए बिहार के सभी प्रमुख दल एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन बाजी नरेंद्र मोदी मार ले गए हैं।
जहां तक हिंदी पट्टी के उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली और भाजपा के गढ़ गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल, कर्नाटक व महाराष्ट्र की बात है तो इन सभी राज्यों में राम मंदिर का असर देखने को मिलेगा। यह वोटों में तब्दील भी होगा। इन राज्यों में लोकसभा की 327 सीटें हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के असम समेत अन्य राज्यों में भाजपा की स्थिति मजबूत दिख रही है। वो यहां पुनः वर्ष 2019 वाला प्रदर्शन दोहरा सकती है। दक्षिण में भी भाजपा को सीटें मिलती दिख रही हैं।
नरेंद्र मोदी जब भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हुए थे, उससे पहले वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 18.80 प्रतिशत था और पार्टी की 116 सीटें थीं, लेकिन वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व ने भाजपा का वोट शेयर 31 प्रतिशत कर दिया और 282 सीटें पार्टी को मिलीं।
भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए ने 336 सीटों पर विजय हासिल की। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने भाजपा के वोट शेयर को और बढ़ा दिया। यह बढ़कर 37.7 प्रतिशत हो गया और पार्टी ने अपने बलबूते पर 303 सीटों पर विजय हासिल की, यानी नरेंद्र मोदी जानते हैं कि जनता को क्या पसंद है और कैसे चुनाव-दर-चुनाव जीत हासिल करनी है।
इस साल लोकसभा चुनाव में चंद दिन ही बचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है, जबकि विपक्षी दल गठबंधन बनाकर सीटों की शेयरिंग में ही उलझे हुए हैं। नरेंद्र मोदी कोई भी मुद्दा विपक्ष के लिए छोड़ नहीं रहे हैं और हताश-निराश विपक्ष केवल घिसे-पिटे पुराने मुद्दों पर ही उन्हें घेरने की नाकाम कोशिश करता दिख रहा है।
राम मंदिर और कर्पूरी ठाकुर के मास्टरस्ट्रोक के बाद ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तरकश में मु्द्दों के तीर खत्म हो गए हैं। चुनाव से पहले वो ऐसे ही और बड़े मास्टरस्ट्रोक खेल सकते हैं, जिनका अनुमान अभी लगाना बेहद मुश्किल है, क्योंकि अब तक नरेंद्र मोदी अपने निर्णयों से चौंकाते ही आए हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो फिलहाल तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई भी चुनौती मिलती नहीं दिख रही है।
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