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फ़िटनेस और स्वास्थ्य को लेकर गजब के दीवाने हैं स्वीडन के लोग

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स्वीडन के लोगों की स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता देखते ही बनती है। - फोटो : Social Media
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स्वीडन के लोगों की स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता देखते ही बनती है। यहां की सड़कों पर एक नज़ारा काफ़ी आम है। सुबह हो या शाम दस साल का बच्चा हो या सत्तर साल के बुज़ुर्ग, सब दौड़ लगाते नज़र आ जाएंगे। कारण है फ़िटनेस। फ़िटनेस के प्रति दीवानगी तो देखिए कि कुछ लोग दफ़्तर के ब्रेक में दौड़ने या जिम व्यायाम करने चले जाते हैं और फिर हल्का भोजन ले लेते हैं। यही नहीं, ज़्यादातर कंपनियां कर्मचारियों को जिम जाने या खेल अभ्यासों के लिए भी राशि देती हैं।

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प्रदूषण रहित वातावरण और आयु 
इसी फ़िटनेस और प्रदूषण रहित वातावरण के बलबूते आज यहां लोगों की औसत आयु 82 वर्ष से ज्यादा की हो चुकी है। एक स्वीडिश व्यक्ति का डॉक्टर के पास इलाज के लिए पहुंचने का प्रतिशत काफ़ी कम है। विश्व बैंक की 2016 की रिपोर्ट बताती है कि स्वीडन के लोगों की औसत आयु 82.2 वर्ष है, जबकि भारत में औसत आयु 68.56 वर्ष ही रह गई है। इसमें पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता दोनों का बड़ा हाथ है। 

 

गर्मी शुरू होते ही आउटडोर योगा क्लास की तो जैसे बाढ़ आ जाती है। - फोटो : file photo
योग को लेकर जागरूकता 
बात योग की करें तो केवल राजधानी स्टॉकहोम में सौ के क़रीब योग से जुड़े संस्थान हैं, जहां अच्छी संख्या में अभ्यार्थियों का जमावड़ा है। हैरानी तब होगी जब इनमें से ज़्यादातर योग संस्थानों को चलाने वाले भारतीय नहीं बल्कि भारत की योग सभ्यता से प्रभावित लोग नज़र आएंगे।

गर्मी शुरू होते ही आउटडोर योगा क्लास की तो जैसे बाढ़ आ जाती है। इसे ज्वॉइन करना निःशुल्क और सभी के लिए खुला होता है, वहीं यहां के अधिकांश पार्क में ओपन जिम का चलन है, जबकि लोगों को फ़िट रखने में म्युनसिपाल्टि  भी योगदान देती है। जगह -जगह इनके ज़रिए जिमखाने व जिम क्लब खोले गए हैं। 

आपको बता दूं कि यहां राजधानी में एक ऐसा जिमखाना भी है जिसमें 90 वर्ष से ज्यादा के लोग व्यायाम के लिए जाते हैं। अधिक उम्र के लोगों के लिए ख़ास जिम इंस्ट्रक्टर भी नियुक्त है। जानने वाली बात यह है कि यहां आवागमन के लिए मेट्रो और प्रदूषण रहित बसों के बाद साइकिल और इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर का ख़ूब चलन है।

कार को रखने वालों की संख्या काफ़ी कम है। ऐसा नहीं है कि कार ख़रीदना यहां जेब से बाहर की बात है, बल्कि ऐसा इस देश के लोगों का पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता को दर्शाता है, तभी तो मोटी कमाई करने या बड़े ओहदे पर विराजमान लोग भीपब्लिक ट्रांसपोर्ट को आवागमन का माध्यम चुनते हैं।  

भोजन को आराम से समय देकर खाते हैं ताकि भोजन पचना भी आसान हो। - फोटो : फाइल फोटो
अच्छी जीवनशैली के प्रति आकर्षण 
कहा जाता है कि यूरोप के नॉरडिक देशों में नार्वे के बाद स्वीडन के लोग सबसे ख़ूबसूरत व फ़िट होते हैं। प्रदूषण मुक्त वातावरण और अच्छी जीवनशैली का इसमें काफ़ी बड़ा योगदान है, जिसे दूसरे देशों को भी जानना चाहिए। स्वीडिश लोग शाम 5 से 7 के बीच अपना भोजन समाप्त कर लेते हैं। डाइनिंग टेबल पर अमूमन एक से डेढ़ घंटे का समय ज़रूर निकालते हैं।

भोजन को आराम से समय देकर खाते हैं ताकि भोजन पचना भी आसान हो। यहां के लोगों के दिन की शुरूआत सुबह पांच से छह के बीच हो जाती है। नाश्ता सात से साढ़े सात और खाना ग्यारह से बारह के बीच लगभग तय है। दफ़्तरों मेंअधिकांश घर का बना भोजन नहीं लाते। रेस्तरांओं में भोजन के लिए जाना उन्हें ज्यादा रास आता है, लेकिन इस समय भी उनके भोजन तले भुने या स्वास्थ्य के लिहाज़ से कम हितकर चीज़ शायद ही हो।

ज़्यादातर लोग आपको भोजन में चावल -दालकी तरह सलाद खाते नज़र आ जाएंगे। स्वीडन के लोग धीरे-धीरे शाकाहार की ओर बढ़ रहे हैं। इसके कारण में भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता है। इसके बाद दिन में ’फीका’ यानी कॉफ़ी के साथ स्नेक्स का चलन है और रात में सात बचे तक भोजन समाप्त, ताकि अगले दो घंटों- तीन घंटों में सोने के समय तक भोजन पच जाए।
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सप्ताह के कामकाजी दिनों में अधिकांश लोग नौ से दस के बीच सो जाते है। - फोटो : फाइल फोटो
सप्ताह के कामकाजी दिनों में अधिकांश लोग नौ से दस के बीच सो जाते है। जबकि सप्ताहांत में अधिकतम ग्यारह बजे तक।

दरअसल, यहां लोग अपने स्वास्थ्य को दूसरे ज़रूरी कामों की तरह तरजीह देते हैं, इसलिए देर रात तक जगना उन्हें पसंद नहीं। शायद इन्हीं सब आदतों की वजह से यहां पेट निकले, बेडौल शरीर वाले ढीले सुस्त लोग शायद ही दिखे। नब्बे प्रतिशत आबादी चुस्त-दुरुस्त और आकर्षक दिखती है।  

यह जानना दिलचस्प होगा कि कुछ लोग अपने दौड़ने वाले जूते (रनिंग शूज) और व्यायाम व दौड़ने के लिए सुटेबल कपड़ेलेकर दफ़्तर जाते हैं। ताकि वे दफ़्तर से सीधा घर नहीं बल्कि दौड़ते हुए कुछ चक्कर काटकर आए। दौड़ने का यह सिलसिला शून्य से दस डिग्री नीचे तापमान (-10) होने या बारिश में भी जारी रहता है।

स्वास्थ्य और फ़िटनेस के प्रति इनकी प्रतिबद्धता को नहीं समझने वालों को बेशक यह सब देखकर आश्चर्य हो सकता है। लेकिन यहां के लिए यह सामान्य बात है। इनकी दिनचर्या मौसम से प्रभावित नहीं होती। लोग औसतन तीन से चार किलोमीटर रोज़ाना टहलना पसंद करते हैं।यह ज़रूर है कि स्वीडनमें ऐसा करना यहां के ठंडे मौसम की वजह से आसान है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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