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स्मृतिशेष: साफ छवि के नेता थे अरुण जेटली, उनके निधन से मैं सदमे में हूं

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अरुण जेटली - फोटो : अमर उजाला
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मेरी जिंदगी में अरुण जेटली की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनकी मृत्यु से मैं गहरे सदमे में हूं। पिछले दो दशक से वह मेरे जीवन को प्रकाशमान कर रहे थे। सांसद बनने से पहले से ही मैं उन्हें जानता था। वह सबसे विरले राजनेता थे। उनकी राजनीति में दो चीजें सबसे अहम थी जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी। ये दो चीजें थी- उनकी ईमानदारी, सत्यनिष्ठता और बौद्धिकता। 

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1975 में जब इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था उस वक्त गिरफ्तार होने वाले नेताओं में अरुण जेटली भी शामिल थे। वह आपातकाल में पूरे 19 महीने तक जेल में रहे। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने अपना ध्यान वकालत पर केंद्रित किया। 1999 में अरुण जेटली पहली बार मंत्री बनें। जब अटल बिहारी वाजपेयी सत्ता में आए तो अरुण जेटली को सूचना और प्रसार मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया।

अपनी मेहनत और मेधा की वजह से जल्द ही अरुण जेटली कानून एवं न्याय और विनिवेश विभागों के कैबिनेट मंत्री बने। उन्होने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान अरुण जेटली से मेरी नजदीकी बढ़ी। उनसे मेरी पहचान टेलीकॉम उद्योगपति के तौर पर  हुई। कई मतभेद भी हुए, लेकिन उन्होंने कभी भी मुझे हतोत्साहित नहीं किया। वह मुझे जरूर टेलीकॉम जेहादी कहने लगे थे। मुझे याद है वो दिन जब मोती महल में हमने कई बार साथ में रात्रिभोज किया। यहां तक की जब उन्होंने सरकार के साथ मेरी कानूनी लड़ाई को अस्वीकार कर दिया था तब भी हमने मोती महल में साथ खाना खाया।

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arun jaitley - फोटो : पीटीआई
2006 में, उन्होंने भाजपा के संसदीय बोर्ड के सदस्य के रूप में राज्यसभा के लिए मेरी उम्मीदवारी का समर्थन किया। साल 2008 में जब 2जी घोटाले में मेरा नाम भी उछला तो वह उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने मेरा समर्थन किया। कई बार मजाक में वह यहां तक कहते थे- आप राजीव से दूरसंचार ले सकते हैं लेकिन सेनानी को लड़ाई से बाहर नहीं निकाल सकते। असहमत होने पर भी वह मेरे काम का समर्थन करते और मुझे प्रोत्साहित करते। वह सूचना एवं तथ्यों के मास्टर थे। जब वह संसद में भाषण देते तो सभी लोग उन्हें ध्यानपूर्वक सुनते थे।

साल 2012 में जब यूपीए सरकार का कोयला घोटाला सामने आया तो अरुण जेटली ने उसे आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला बताया था। वह भारतीय जनता पार्टी में उन कुछ चुनिंदा नेताओं में थे जो स्पष्ट बोलते थे। मैं संसद में जो संविधान की कॉपी अपनी जेब में रखकर ले जाता हूं, अरुण जेटली ने ही वो मुझे तोहफे में दी थी। अरुण जेटली के प्रयासों से ही मोदी सरकार में जीएसटी को सफलतापूर्व लागू किया। उन्होंने ही मुझे संसदीय चयन समिति में नामांकित किया था। उन्होंने साल 2002 और 2007 में गुजरात, 2003 में मध्यप्रदेश, 2005 में बिहार, 2007 और 2012 में पंजाब में भारतीय जनता पार्टी के लिए कैंपने किया। साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने पूरे जोर-शोर के साथ भाजपा के लिए प्रचार किया। उनके यों चले जाने से मुझे गहरा सदमा लगा है। मनोहर पर्रिकर, सुषमा स्वराज और अब अरुण जेटली जैसे नेताओं के निधन ने भारतीय जनता पार्टी अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें। 
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