2006 में, उन्होंने भाजपा के संसदीय बोर्ड के सदस्य के रूप में राज्यसभा के लिए मेरी उम्मीदवारी का समर्थन किया। साल 2008 में जब 2जी घोटाले में मेरा नाम भी उछला तो वह उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने मेरा समर्थन किया। कई बार मजाक में वह यहां तक कहते थे- आप राजीव से दूरसंचार ले सकते हैं लेकिन सेनानी को लड़ाई से बाहर नहीं निकाल सकते। असहमत होने पर भी वह मेरे काम का समर्थन करते और मुझे प्रोत्साहित करते। वह सूचना एवं तथ्यों के मास्टर थे। जब वह संसद में भाषण देते तो सभी लोग उन्हें ध्यानपूर्वक सुनते थे।
साल 2012 में जब यूपीए सरकार का कोयला घोटाला सामने आया तो अरुण जेटली ने उसे आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला बताया था। वह भारतीय जनता पार्टी में उन कुछ चुनिंदा नेताओं में थे जो स्पष्ट बोलते थे। मैं संसद में जो संविधान की कॉपी अपनी जेब में रखकर ले जाता हूं, अरुण जेटली ने ही वो मुझे तोहफे में दी थी। अरुण जेटली के प्रयासों से ही मोदी सरकार में जीएसटी को सफलतापूर्व लागू किया। उन्होंने ही मुझे संसदीय चयन समिति में नामांकित किया था। उन्होंने साल 2002 और 2007 में गुजरात, 2003 में मध्यप्रदेश, 2005 में बिहार, 2007 और 2012 में पंजाब में भारतीय जनता पार्टी के लिए कैंपने किया। साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने पूरे जोर-शोर के साथ भाजपा के लिए प्रचार किया। उनके यों चले जाने से मुझे गहरा सदमा लगा है। मनोहर पर्रिकर, सुषमा स्वराज और अब अरुण जेटली जैसे नेताओं के निधन ने भारतीय जनता पार्टी अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है।
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