सुंदरता और पक्षियों की विविधता को देख अत्यन्त उत्साहित हो जाता है
- फोटो : ऐशा
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान- पक्षियों की विविधता भरा संसार
केवलादेव पहुंचने पर वायुराज एक बार पुनः वहां कि सुंदरता और पक्षियों की विविधता को देख अत्यंत उत्साहित हो जाता है। एक बार को तो वह भूल भी गया की वह अपने झुंड से बिछड़ गया है। वहां उसे झुंड के झुंड ढोक (पेंटेड स्टोर्क), राजीव अम्बुकुक्कुटी (पर्पल मूरहेन), ग्लॉसी इबिस, ग्रे बगुला (ग्रे हेरॉन) डार्टर व अन्य अद्भुत पक्षियों का परिचय मिला और वह पक्षी प्रजातियों कि विविधता में खो गया। तभी उसे केवलादेव के जलाशय में बार-हेडेड गूज का एक झुंड दिखा।
गूज के झुंड को देख कर वह अत्यंत प्रफुल्लित हुआ और समीप जाकर अपनी मां को ढूंढने लगा। कुछ ही पलों में वह अपनी मां से मिल गया और थोड़ी झिरकी पाने के बाद, उसने अपनी मां को अपनी यात्रा कि कहानी सुनाई।
वायुराज की मां ने उसे बताया की झुंड तमिलनाडु के पॉइंट कैलीमेर सैंक्चुअरी की ओर ही अग्रसर था, किंतु वायुराज के पीछे छूट जाने के कारण, झुंड ने केवलादेव में अपने ठहराव की अवधि बढ़ा ली थी। झुंड को यकीन था कि वायुराज की चंचलता और उत्सुकता उसे केवलादेव तक ले ही आएगी।
झुंड ने वायुराज के पुनः मिल जाने पर जोरों से हॉर्न की आवाज में खुशी मनाई और तय किया की वह जल्द ही पॉइंट कैलीमेर की यात्रा पर निकलेंगे, भारत में अपनी शिशिर यात्रा पूर्ण करने। अब वायुराज पहले जितना ही उत्सुक तो था किन्तु अब सचेत भी था।
झुंड आखिर पॉइंट कैलीमेर पहुंचता है और मध्य एशियाई सर्दियों से बचने के लिए पॉइंट कैलीमेर के आरामदेह हल्के उष्ण वातावरण में अपनी भारत की यात्रा का समापन करता है। वायुराज को यहां भी अन्य शिशिर प्रवासी पक्षियों से मित्रता करने का मौका मिलता है।
स्पॉट बिल्ड पेलिकन, कर्ल्यू सैंडपाईपर, ब्लैक नेक्ड स्टोर्क जैसे पक्षियों से मिल वह जान पाया की भारत में शिशिर प्रवासी पक्षियों की विविधता अत्यंत सुखद है। वायुराज जैसे पक्षी प्रेमी, शिशिर का वर्ष पर्यन्त इंतजार करते हैं, ताकि वायुराज समेत वे अन्य सभी भिन्न प्रजाति के प्रवासी प्रक्षियों का स्वागत कर सकें।
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