पंजाब में देश के बाकी उत्तर भारतीय राज्यों से हटकर होली को ‘होला मोहल्ला’ के रूप में मनाने की प्रथा है, जिसे सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह ने शुरू की थी।
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पंजाब में होली का क्रांतिकारी रंग
पंजाब में प्रचंड बहुमत से चुनाव जीती आम आदमी पार्टी (आप) के लिए तो यह क्रांतिकारी होली है। लोगों को उम्मीद तो थी कि आप वहां सरकार बना सकती है, लेकिन इतने भारी बहुमत से बनाएगी, यह तो शायद अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने भी नहीं सोचा होगा। यही कारण है कि मान ने सीएम के रूप में अपनी शपथ ग्रहण के लिए शहीदे आजम भगत सिंह की जन्म स्थली खटकड़कलां को चुना।
पंजाब की होली में गुलाल के साथ-साथ एक बसंती रंग हमेशा इठलाता आया है।
दरअसल, पंजाब में देश के बाकी उत्तर भारतीय राज्यों से हटकर होली को ‘होला मोहल्ला’ के रूप में मनाने की प्रथा है, जिसे सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह ने शुरू की थी। होली के दौरान निहंग सिख पूरे लाव लश्कर के साथ अपनी पारंपरिक युद्ध कला का प्रदर्शन करते हैं। जिसमें शौर्य और त्याग का मिलाजुला रंग होता है।
पंजाब में अब सत्ता की कमान उन भगवंत मान के हाथ में है, जिन्होंने नेता के बजाए जनता ही बने रहने की कसम खाई है। मान पूर्व कमेडियन रहे हैं। सीएम बनने के बाद वो एक ‘विदूषक और प्रशासक’ का कौन सा ब्लेंड पेश करते हैं, देखने की बात है।
इस दफा होली के जोशीले होने की पीछे एक बड़ा कारण दो साल बाद मन रही कोरोना तनाव मुक्त होली भी है। यूं तो देश में कोरोना के इक्का-दुक्का मामले अभी भी आ रहे हैं, लेकिन बीते दो सालों में फाल्गुन पर मस्ती के बजाए कोरोना की दहशत का जो रंग चढ़ा हुआ था, वो इस दफा हाशिए पर है। लोग सुकून में हैं।
बाजार रंगों, पिचकारियों और मिठाइयों से भरे पड़े हैं। बच्चे भी खुलकर एक दूसरे को रंग लगा सकेंगे। लोग एक दूसरे से गले मिल सकेंगे। फर्क इतना है कि राजनीतिक होली में दिल स्वार्थों के हिसाब से मिलते हैं और रंग सियासी आग्रहों के हिसाब से उड़ते हैं।
चुनावी नतीजे इन्हे और सुर्ख बनाते या फिर फीका करते हैं। लेकिन यह रंग, रंग भले बदले लेकिन रहता कायम है। वही हो भी रहा है।