हरियाणा सरकार के कर्मचारियों-अधिकारियों से ससुराल से मिली संपत्ति का ब्योरा मांगने पर हरियाणा कर्मचारी महासंघ ने कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन के प्रांतीय महासचिव वीरेंद्र सिंह धनखड़, उप महासचिव कुलदीप शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता राम लाल ने कहा कि चुनाव घोषणा पत्र में शामिल वादे खोखले साबित हुए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या सभी राजनीतिक दलों, नेताओं व उच्च अधिकारियों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक कर दिया है।
प्रदेश में 1.25 लाख पद खाली पड़े हुए हैं, उन्हें भरने की ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। सरकार में बैठे अधिकारी तुगलकी फरमान जारी करने में ही लगे हैं। हरियाणा का कर्मचारी पंजाब के कर्मचारी से प्रतिमाह लगभग 15000 रुपये कम वेतन ले रहा है।
इसके विपरीत हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंत्री व विधानसभा के सभी 90 विधायक पंजाब सरकार के मंत्रियों व विधायकों से कहीं ज्यादा वेतन व भत्ते प्राप्त कर रहे हैं। महासंघ सरकार को चेतावनी देता है कि बिजली निगम के कर्मचारियों के आंदोलन को प्रदेश की जनता, महासंघ का पूरा सहयोग व समर्थन है।
29 जून को हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी प्रदेश के सभी डिपुओं पर दो घंटे विरोध प्रदर्शन करेंगे। रोडवेज संयुक्त संघर्ष समिति 15 जुलाई को मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र करनाल में प्रदेश व्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी। महासंघ ने सरकार को 26 सूत्रीय मांग पत्र फिर भेजा है। जिसमें सभी मांगें शामिल हैं। आंदोलन के अगले चरण में 21 अगस्त को कर्मचारी पूर्ण रूप से हड़ताल पर चले जाएंगे।