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वाइल्ड लाइफ के शाैकीन हैं ताे इस शहर की अाेर कर सकते हैं रुख

Thu, 01 Feb 2018 08:24 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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वाइल्ड लाइफ के शाैकीन हैं ताे अापकाे कानपुर जू अाने की जरूरत है। एक तरफ जहां सेव टाइगर्स की मुहिम दुनिया भर में चल रही है और जंगली जानवर संरक्षित श्रेणी में नामांकित किए जा रहे हैं। ऐसे में कानपुर चिड़ियाघर न सिर्फ देश और बल्कि दुनिया को सकारात्मक खबरें दे रहा है।

 
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गैंडे और बारहसिंगा की आबादी बढ़ाने में सेंट्रल जू अथॉरिटी से ब्रीडिंग सेंटर का दर्जा पा चुका कानपुर जू अब शेर और बाघों की ब्रीडिंग में आगे बढ़ रहा है। यही वजह है कि बीते साल बाघिन त्रुशा ने चार और शेरनी नंदिनी ने पांच शावकों को जन्म दिया है। दो साल पहले कानपुर जू में एक भी शेर नहीं था।

 
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छत्तीसगढ़ के रायपुर चिड़ियाघर से शेर-शेरनी अजय नंदिनी का जोड़ा आया। यहां पर शेरों की ब्रीडिंग के लिए अनुकूल माहौल तैयार कराने के लिए जू के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बाड़े को रीडिजाइन कराया। पहले यहां पर चारों तरफ से दर्शक आते जाते थे, जिससे ब्रीडिंग का वातावरण प्रभावित होता था। बदले डिजाइन में अजय और नंदिनी से तीन शावकों को पिछले साल जन्म दिया।

 

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इसमें से दो की मौत हो गई लेकिन मादा शावक सुंदरी अब स्वस्थ है। पिछले साल ही नंदिनी ने दो अन्य शावकों को जन्म दिया। इसमें एक नर और एक मादा शावक हैं, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं। बाघिन त्रुशा ने भी बीते साल चार शावकों को जन्म दिया। इसमें तीन नर और एक मादा हैं, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं।

 
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अभी जू में सात बाघ और चार बाघिन हैं, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं। पूरी दुनिया में थॉमिन डियर की आबादी तेजी से घट रही है। इस समय दुनिया में 250 से 300 थॉमिन डियर हैं। इनको बचाने के लिए दुनिया भर के पशु प्रेमी कोशिशें कर रहे हैं लेकिन इन्हें कानपुर में बेहतर माहौल मिल रहा है। इस समय कानपुर जू में 14 थॉमिन डियर है।

 
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पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बताया बीते साल नवंबर में बच्चे इन्होेंने जन्मे लेकिन अफसोस कि इसमें कोई मादा नहीं थी। लकड़बग्घा का कुनबा दिनों दिन बढ़ रहा है। यहां से लकड़बग्घों को त्रिवेंद्रम, हैदराबाद, विशाखापट्टनम, चंडीगढ़, जयपुर, गुवाहाटी समेत देश भर में भेजे गए हैं। कानपुर जू को बतौर ब्रीडिंग सेंटर विकसित करना आसान नहीं है। प्राकृतिक माहौल का अहसास कराना और जानवरों की देखभाल बेहद जरूरी है।

 
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​गैंडे में ब्रीडिंग के पहले मिलन के दौरान बेहद सावधानी बरती जाती है। अगर यह भड़क गए तो बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसे में फायर ब्रिगेड की गाड़ी को बुलाया जाता है, जिससे आक्रोशित होने पर पानी की मोटी धार से इन्हें अलग किया जा सके। जू में करीब 30 कर्मचारी इस दौरान अलर्ट होते हैं। डॉ. आरके सिंह का कहना है कि गैंडे और बारहसिंगा के लिए ब्रीडिंग सेंटर के तौर मिली सीजेडए की मान्यता के लिए बहुतों की मेहनत शामिल है।
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