हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं के बाद आखिरकार बड़े अफसरों पर गाज गिर ही गई। आंदोलन के दौरान पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता के आरोपों का सामना कर रही प्रदेश सरकार ने मंगलवार को राज्य पुलिस के डीजीपी यशपाल सिंघल को हटाने के साथ ही उन्हें डीजी जेल का पद सौंपकर किनारे बैठा दिया।
सिंघल की जगह पर सरकार ने 1985 बैच के आईपीएस केपी सिंह को राज्य पुलिस प्रमुख का जिम्मा सौंपा है। इसी प्रकार एडीजीपी सीआईडी शत्रुजीत सिंह कपूर को भी बदला गया है। प्रदेश सरकार जहां आंदोलन के दौरान उपद्रव न रोक पाने का आरोप झेल रही है, वहीं मुरथल में महिलाओं से गैंगरेप का मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद सरकार की किरकिरी और बढ़ी है। आखिरकार चौतरफा आरोपों के बीच सरकार ने पुलिस प्रशासन को ही सबसे पहले सुधारने जैसा कदम उठाया है।
केपी सिंह राज्य सरकार की ओर से आंदोलन के दौरान अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए गठित गई प्रकाश सिंह कमेटी के भी सदस्य हैं। वे इस समय डीजी क्राइम के पद पर तैनात थे। इससे पहले वे डीजी पुलिस रिफार्म भी रह चुके हैं।
इस बीच, प्रदेश सरकार ने सीआईडी के एडीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर को भी मौजूदा पद से हटाकर एडीजीपी क्राइम तैनात कर दिया है। आरक्षण आंदोलन के दौैरान प्रदेश के कई भागों में हुई भारी हिंसा की घटनाओं को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने पुलिस के खुफिया तंत्र पर सवाल उठाए थे।
इसके साथ ही, सरकार ने भी कई अवसरों पर यह स्वीकार किया कि पुलिस समय रहते उपद्रवियों की योजनाओं का पता नहीं लगा सकी। शत्रुजीत सिंह कपूर के स्थान पर हिसार रेंज के आईजी और 1994 बैच के आईपीएस अनिल कुमार राव को आईजी सीआईडी लगाया गया है।