हरियाणा में अब तक स्वायत्त संस्था के रुतबे के साथ चलते रहे निजी मेडिकल कालेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों पर सरकार ने शिकंजा कसने का मन बना लिया है। इनकी ओर सरकार का ध्यान फरीदाबाद के गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च के मालिक द्वारा अचानक कालेज को ताला लगा दिए जाने से 400 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटकने की घटना से गया है।
सरकार ने अब फैसला लिया है कि भविष्य में कोई भी मेडिकल कालेज सरकार की अनुमति के बिना नहीं खोला जाएगा। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग की बैठक में लिए गए इस फैसले की पुष्टि करते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि अब तक प्रदेश के निजी मेडिकल कालेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों पर राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं था और यह विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे थे।
इसीलिए यह फैसला लिया गया है। बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि अगर भविष्य में स्वास्थ्य विभाग किसी मेडिकल कालेज को अनुमति देगा तो उसके लिए सबसे पहले कालेज खोलने वाले संगठन की आर्थिक स्थिति का आकलन करने के साथ-साथ 50 करोड़ रुपये का बांड भरवाया जाएगा ताकि मेडिकल कालेज बंद हुआ तो राज्य सरकार उसके विद्यार्थियों के भविष्य का खर्च बांड की रकम से पूरा कर सकेगी।
इसके साथ ही यह फैसला भी किया गया है कि प्रदेश के मौजूदा सभी मेडिकल कालेजों को पीजीआई रोहतक से संबद्ध किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में इस समय दो निजी मेडिकल विश्वविद्यालय- मुलाना में महार्षि मार्केंडेश्वर यूनिवर्सिटी और गुड़गांव में एसजीटी यूनिवर्सिटी कार्यरत हैं।