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नारी निकेतन रेप और गर्भपात मामले के खुलासे में रहा इनका अहम योगदान

Thu, 23 Mar 2017 12:52 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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vijay laxmi gusain
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नारी निकेतन में संवासिनी के साथ हुए रेप और गर्भपात प्रकरण के जिस खुलासे के लिए अमर उजाला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला, उसे मुकाम तक पहुंचाने में तत्कालीन बाल संरक्षण आयोग और महिला सशक्तिकरण की उपाध्यक्ष विजय लक्ष्मी गुसाईं नींव का पत्थर रहीं थी।
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मामले के खुलासे के दौरान विलेन के तौर पर उभरी, गुसाईं के बारे में यह सूचना पाठक को हैरान करने वाले होगी कि विलेन की भूमिका उन्होंने खुद चुनी थी, ताकि वह सच्चाई सामने लाने में अमर उजाला की मदद करती रहें और किसी को उन पर शक न हो।

महज एक गोपनीय पत्र की सूचना पर सच्चाई की खातिर एक भ्रष्ट सिस्टम से लड़ने खाली हाथ उतरे अमर उजाला को विजय लक्ष्मी गुसाईं ने लड़ाई के लिए सबसे अहम हथियार हासिल करने में मदद की थी। नारी निकेतन में दो मूक-बधिर संवासिनियों के इशारों का स्टिंग उन्हीं की मदद से संभव हो सका था। उस वक्त वह योजनाबद्ध तरीके से अमर उजाला का निशाना बनने को भी तैयार हो गईं थीं, ताकि भ्रष्ट सिस्टम में बैठे नारी निकेतन के गुनाहगारों के संरक्षकों को उन पर शक न हो।
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पाठकों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि ये खुलासा अब क्यों ? जवाब यह है कि अब बदली हुई हवा में वे इसके लिए तैयार हो गईं। वरना, अमर उजाला ने उनके योगदान को जब रेखांकित करना चाहा, तो सत्ता पक्ष से जुड़ी होने की वजह से उन्होंने हाथ जोड़ लिए कि ईश्वर तो देख ही रहा है।

वे अमर उजाला को मदद कर रहीं हैं, इसकी भनक उस वक्त सत्ता को लग भी गई थी। उन्होंने सरकार को भी नारी निकेतन से जुडे तथ्यों की सही रिपोर्ट भी दी थी, मगर सरकार ने उस पर कार्रवाई करने की बजाए उन्हें बाल आयोग के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया था। उन्हें अपनी सरकार की खासी नाराजगी भी झेलनी पड़ी। हालांकि महिला सशक्तिकरण की उपाध्यक्ष के नाते वह नारी निकेतन का हाल लेती रही और जब भी जिस सूचना की जरूरत पड़ी उसे जुटाने में उन्होंने मदद की।

हम उन दिनों की कहानी सुना रहे हैं, जब अमर उजाला ने नारी निकेतन के गुनाहगारों के खिलाफ लड़ाई का बिगुल बजा दिया था। अमर उजाला में पहली खबर प्रकाशित होने के बाद 17 नवंबर-2015 को विजय लक्ष्मी जब नारी निकेतन पहुंची तो उन्होंने वहां अमर उजाला की रिपोर्टर नलिनी को भी बुला लिया। इस दौरान विजय लक्ष्मी ने बाकी संवासिनियों और नारी निकेतन स्टाफ को बातों में उलझाया तो अमर उजाला की रिपोर्टर ने चुपचाप कमरे में जाकर कुछ संवासिनियों से बातचीत शुरू कर दी।

रिपोर्टर ने मूक बधिर संवासिनियों का वीडियो भी बना डाला। इशारों में मूक-बधिर संवासिनियों ने नारी निकेतन में हो रहे कुकृत्य की एक-एक जानकारी दे दी थी।  इस वीडियो की भनक नारी निकेतन स्टाफ को नहीं लग पाई। हम यह भी बता दें कि इस वीडियो को आधार बनाकर उस वक्त सरकार के चहेते कुछ अफसरों ने अमर उजाला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी कर ली थी।

यही वह वीडियो था जिसने सरकार को बैकफुट पर भेज दिया और तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दे दिए। एफआईआर दर्ज हुई तो दबाव में आए बिना तत्कालीन एसएसपी देहरादून, डॉ. संदानन्द दाते ने दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया। नतीजा नौ गुनाहगार जेल पहुंच गए। सरकार ने भी रुख बदला और नारी निकेतन का कायाकल्प हो गया। हालांकि इस मामले को दबाने की भूमिका तैयार करने वाली प्रोबेशन अधिकारी मीना विष्ट आराम से काम करती रहीं। उन्हें नारी निकेतन की संवासिनियों को घर भिजवाने के लिए राज्यपाल से भी सम्मान दिलवा दिया गया। तत्कालीन समाज कल्याण डॉयरेक्ट वीएस धानिक जिनके कार्यकाल में नारी निकेतन में कुछ संवासिनियों का यौनशोषण हुआ। संवासिनियों को नारी निकेतन में नारकीय यातनाएं भुगतनी पड़ी, उन्हें रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन का तोहफा दे दिया गया।
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