इटावा। प्रदर्शनी पंडाल में शुक्रवार रात कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें अरविंद योगी ने सुनाया जब बाट किसी ने हेरी, तब हमने गीत लिखे। मूर्तिकार ने मूर्ति उकेरी तब तब हमने गीत लिखे। रोहित चौधरी ने गरजते हुए कहा कि मैं भूषण की सिंह गर्जना खुद की ताकत रखता हूं। वंदे मातरम् होठों पर दिल में भारत रखता हूं। इन पंक्तियों पर जमकर तालियां बजीं।
सम्मेलन की शुरुआत वरिष्ठ कवि दीपचंद्र त्रिपाठी निर्बल ने की। उन्होंने सुनाया मात वीणापणि करुणा कीजिए। दास निर्बल की विनय सुन लीजिए । अवधेश भ्रमर ने ललकारते हुए कहा, वचन मीठे किंतु गंदे आचरण हैं और चेहरे पर बहुत से आवरण हैं, पंक्तियां सुनाईं। गोविंद माधव शुक्ला ने रचना पढ़ी, घाव कैसा भी हो एक रोज तो भर ही जाता है। ये अलग बात है कि निशां जाते-जाते जाता है। भरथना से यह वरिष्ठ कवि अनिल दीक्षित ने मुक्तक पढ़ा, किसी-किसी के खजाने के लिए होती है, कहीं टेबल पे सजाने के लिए होती है। हमसे पूछोगे तो हम ये ही कहेंगे यारो, रोटियां भूख मिटाने के लिए होती है। इन पंक्तियों ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे सुधीर मिश्र ने रचना सुनाई, दर्द की जमीन हो गई। जिंदगी मशीन हो गई। शिव गोपाल अवस्थी की ये रचना भी खूब सराही गई। कहा कि बुजुर्गों की जमीनें बेचकर धनवान मत होना, पलायन करके अपने गांव की पहचान मत खोना। सुनील अवस्थी ने चोट करते हुए कहा, काश तुम्हारी हर हरकत पर तुरत तमाचा मारा होता तो भारत की अबलाओं की चूड़ियां छिनती नहीं।
महेश मंगल ने पढ़ा, इस अली में नहीं उस बली में नहीं, हम किसी कीर्तन मंडली में नहीं। प्रमोद तिवारी हंस ने सुनाया, तुम मिले तो सही पर मिले ही नहीं, पुष्प मन के तुम्हारे खिले ही नहीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गजलकार अशोक यादव ने अपनी रचनाओं से समा बांधा, दिल की बात जुबां पर लाना कितना मुश्किल होता है। किसी को उसका सच बतलाना कितना मुश्किल होता है।
महिला कवयित्री डॉ. मंजू यादव ने ग़ज़ल सुनाई, दैरो हरम में क्यों मुझे उलझा रहे हो तुम। नफ़रत के बीज हर जगह बिखरा रहे हो तुम। कार्यक्रम अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार ब्रजानंद शर्मा ने की। देवेश शास्त्री, आलोक भदौरिया अर्श, कमलेश वर्मा, प्रेम नारायण त्रिपाठी प्रेम, रजनीश त्रिपाठी, प्रतिमा चतुर्वेदी, सत्यनारायण शर्मा, अवनीश त्रिपाठी, प्रशांत तिवारी, हर्ष शर्मा, सुरेश चंद्र दुबे, राजवीर माथुर, सुमित कुमार, निहारिका ने भी काव्यपाठ किया। अंत में संयोजक विशंभरनाथ भटेले ने आभार जताया। प्रथम सत्र का संचालन डॉ.सुशील सम्राट ने व दूसरे का सुधीर मिश्र ने किया।