बाजारों को बंद करने के मुद्दे पर चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने (सीटीआई) ने व्यापारियों की महापंचायत बुलाई है। मंगलवार को इस पंचायत में 200 व्यापारी संगठनों को किया आमंत्रित किया गया है। व्यापारियों की इस बैठक में पुलिस प्रशासन और एमसीडी की जिम्मेदारी पर चर्चा होगी।
दिल्ली के बाजारों में बढ़ रही भीड़ और कोविड गाइडलाइन्स का गंभीरता से पालन नहीं होने पर प्रशासन सख्ती बरत रहा है ।पहले लक्ष्मी नगर मार्केट, फिर गांधी नगर मार्केट की 12 दुकानें, नांगलोई में 2 बाजार, सदर बाजार रूई मंडी, लाजपत नगर सेन्ट्रल मार्केट को पिछले 5 दिनों के अंदर बंद कर दिया गया है जिसको लेकर दिल्ली के व्यापारियों में असंतोष का माहौल है।
इसी मुद्दे पर अब व्यापारियों के संगठन चैम्बर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने व्यापारियों की एक महापंचायत बुलाई है जिसमें दिल्ली के 200 बड़े व्यापारी संगठनों को आमंत्रित किया गया है ।सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल और अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से दिल्ली के बाजारों को बंद किया जा रहा है इससे डर का माहौल है।
व्यापारियों का कहना है कि डीडीएमए द्वारा बाजारों में भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी व्यापारियों और मार्केट एसोसिएशन्स पर डाली जा रही है जबकि इसके लिए पुलिस प्रशासन और एमसीडी जवाबदेह होने चाहिए क्योंकि व्यापारी अपनी दुकान, गोदाम, ऑफिस के अंदर बाहर तक तो कोरोना नियमों का पालन करा सकते हैं लेकिन मेन रोड या सार्वजनिक सडक पर भीड़ को नियंत्रित करने की पावर व्यापारियों के पास नहीं है ।
सदर बाजार, चांदनी चौक, कमला नगर, कनोट प्लेस, लाजपत नगर, नेहरू प्लेस , सरोजनी नगर जैसे बड़े मार्केट एसोसिएशन्स का कहना है कि अवैध रेहड़ी पटरी और हॉकर्स के कारण भी बाजारों में भीड़ बढ रही है जिनको नियंत्रित करने की जिम्मेदारी और पावर मार्केट एसोसिएशन्स के हाथ में नहीं है ।