मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में अवैध रेत का उत्खनन लगातार बढ़ता जा रहा है। इस अवैध उत्खनन से न सिर्फ शासन को राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि जल प्रदूषण होने के साथ गांव की सड़कें भी भारी वाहनों के निकलने से क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इसके चलते सेमरला पंचायत के ग्रामीणों ने बड़वाह एसडीएम को शिकायती आवेदन देकर अवैध उत्खनन बंद करवाने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि बगैर अधिकारियों की मिलीभगत के इतनी बड़ी मात्रा में यह काला कारोबार नहीं हो सकता है।
दरअसल, खरगोन जिले की बड़वाह तहसील की ग्राम पंचायत सेमरला, कपास्थल और गंगातखेडी अवैध रेत उत्खनन का गढ़ बनती जा रही हैं। यहां से रेत से भरे ट्रक, ट्रैक्टर बड़ी संख्या में इन गांवों से होकर गुजरते हैं। गांव के सरपंच महेश गुर्जर, उपसरपंच शंकर वर्मा, पूर्व सरपंच कालूसिंह सोलंकी समेत अन्य ग्रामीणों के आरोप हैं कि वे इसे लेकर कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे है। हमारी समस्या का जल्द निराकरण नही हुआ तो अब आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अवैध उत्खनन करने वाले मशीनों से निकाल रहे रेत
रेत का अवैध उत्खनन का कार्य करने वाले बड़ी-बड़ी मशीनों के जरिए धडल्ले से नर्मदा किनारे से रेत निकाल रहे हैं। रेत निकालने वाले ठेकेदारों ने 8 से 10 डीजल इंजन नदी में लगा रखे हैं। इस रेत को पोकलेन मशीनों से रेत परिवहन करने वाले डंपरों में भरकर भेज दिया जाता है।
भारी वाहनों के निकलने से सड़कों की हालत खसता
काली रेत के अवैध परिवहन के कारण तीनों गांवों की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत बनी सड़कें अब क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। अवैध रैत का परिवहन करने वाले अवैध डंपरों के रात-दिन निकलने के कारण इस मार्ग पर बड़े बड़े गड्डे हो गए हैं। जिससे ग्रामीणों को आवागमन करने में काफी कठिनाइयां हो रही हैं।
जल प्रदूषित कर रहे रेत के अवैध उत्खननकर्ता
शिकायत करने पहुंचे ग्रामीणों के अनुसार उनके गांव के समीप में शासन की महती नल-जल योजना के तहत लगभग 60 गांव में पीने के पानी का सप्लाई का कार्य किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में डीजल इंजन का उपयोग नदी में किया जाना और इन डीजल इंजनों से अवैध डंपरों को धोये जाने से बड़ी मात्रा में नर्मदा का जल दूषित हो रहा है।
खनीज विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में
शिकायत करने पहुंचे ग्रामवासियों ने कहा कि अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है। इस कार्य में अधिकारियों की भूमिका विचारणीय है, जबकि नर्मदा नदी से अवैध रूप से रेत निकालने और डीजल इंजनों का उपयोग किये जाने के मामले को शासन द्वारा लोक स्वास्थ्य हितों को दृष्टिगत रखते हुए स्थायी तौर पर प्रतिबंधित किया गया है। इसके बाद यहां सब कुछ हो रहा है। प्रशासन को इस काले कारोबार पर लगानी चाहिए।