अरावली की वादियों में हर साल सूरजकुंड में लगने वाले अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का आयोजन साल में दो बार करने की योजना बनाने का काम शुरू हो गया है। मेले में दर्शकों का बढ़ता रुझान और शिल्पकारों द्वारा मेला अवधि बढ़ाए जाने की मांग को ध्यान में रख सरकार इसकी तैयारी में जुटी है।
मंगलवार को श्रीलंका की उच्चायुक्त चित्रांगना वागिसवार के साथ हुई मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष से मेला एक फरवरी को शुरू करने के बजाय फरवरी माह के पहले शुक्रवार से शुरू किया जाएगा और तीसरे रविवार को समाप्त किया जाएगा।
इससे मेला आने के लिए तीन वीकेंड मिलेंगे और दिन 15 से बढ़कर 17 हो जाएंगे। श्रीलंका की उच्चायुक्त चित्रांगनी ने अगले वर्ष मेले में श्रीलंका को भागीदार देश के रूप में शामिल करने की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में श्रीलंका पिछले 9 सालों से भाग ले रहा है।
वर्ष 2014 में भागीदार देश भी रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच बहुत सामानताएं हैं। इसलिए हमारी संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा के कलाकारों का एक दल श्रीलंका में भेजना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत से श्रीलंका फाउंडेशन की बैठक आगामी 10 मार्च 2017 को होनी है।
11 लाख से अधिक दर्शक देख चुके मेला
मुख्यमंत्री ने प्रेसवार्ता में बताया कि पिछले वर्ष 9.57 लाख दर्शकों ने मेले का आनंद लिया था। इस बार मेला समापन के एक दिन पहले तक आंकड़ा पहुंचकर 11.05 लाख तक पहुंच गया। मेले में अब तक 1.90 लाख विदेशी पर्यटक भी आ चुके हैं। जबकि पिछली बार ये आंकड़ा 1.69 लाख था। अब तक 4 करोड़ 52 लाख रुपये की टिकट बिक्री हो चुकी है। पिछली बार ये आंकड़ा तीन करोड़ 52 लाख का था।
100 करोड़ से अधिक का हुआ कारोबार:
पर्यटन विभाग के एमडी और डीसी समीरपाल सरो ने बताया कि अब तक मेले में 100 करोड़ से अधिक का कारोबार हो चुका है। उन्होंने बताया कि अकेले रविवार को 1.6 करोड़ रुपये की टिकट बिक्री हुई थी जबकि शनिवार को ये आंकड़ा 97 लाख रुपये तक पहुंच गया था।
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