प्रदेश में शिटाके मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए इससे पहले प्रदेश में कई कार्यशालाएं हो चुकी हैं। ये कार्यशालाएं जीका हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन योजना के तहत आयोजित की गई हैं।
हाल ही में जापान के प्रतिनिधियों ने हिमाचल आकर इसे उगाने का प्रशिक्षण किसानों को दिया। जापान के अलावा चीन और दक्षिणी कोरिया शिटाके मशरूम का सबसे बड़े निर्यातक हैं।
हालांकि, हिमाचल में अभी इसकी पैदावार प्रायोगिक तौर पर ही की गई है। अब किसानों को इसे व्यावसायिक तौर पर उगाने को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उनकी आमदनी को कई गुणा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने बताया कि जीका प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 1000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा।
कैं सर रोधी शिटाके मशरूम की दो से तीन हजार रुपये प्रति किलो में बिक्री
शिटाके मशरूम के कई औषधीय गुण होते हैं। इसमें कैंसर प्रतिरोधी क्षमता होती है। इसलिए इसकी खूब मांग रहती है। भारत की मंडियों में इसका एक किलो दो से तीन हजार रुपये तक बिक सकता है।