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सोसाइटी के गार्ड की गुंडागर्दी: अविवाहितों को फ्लैट न देने के विवाद में मां-बेटे को पीटा, आरोपी गिरफ्तार

Thu, 24 Jul 2025 09:49 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त कोषाध्यक्ष सुशील तोमर ने बताया कि कानूनी दृष्टि से सोसाइटी ऐसा कोई नियम नहीं बना सकती जो भारतीय संविधान में किसी वर्ग के खिलाफ हो। किसी को सिर्फ इसलिए फ्लैट किराये पर न देना कि वह अविवाहित है। संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) के खिलाफ है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्रेटर नोएडा की मिग्सन ट्विन्स सोसाइटी में बुधवार शाम पांच बजे बैचलर्स (अविवाहित) को फ्लैट नहीं देने के मामले पर एक महिला और उसके बेटे की गार्ड से कहासुनी हो गई। कहासुनी के बाद एक सुरक्षा गार्ड ने महिला और उसके बेटे को डंडे से पीटकर भगा दिया। सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपी गार्ड विपिन (25) को गिरफ्तार किया है।

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कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि डेल्टा-3 में रहने वाली एक महिला अपने पुत्र और एक अन्य युवक को साथ लेकर उन्हें सोसाइटी में किराये पर लिए फ्लैट में शिफ्ट कराने के लिए पहुंची थी। सोसाइटी के प्रवेश द्वार पर उसे गार्ड ने रोक लिया। महिला को बताया गया कि सोसाइटी में बैचलर्स को फ्लैट किराए पर देने की मनाही है। यह नियम सोसाइटी के लोगों ने बनाया है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। सोसाइटी के गार्ड ने महिला और उसके बेटे के साथ हाथापाई कर डंडा चला दिया। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी गार्ड को गिरफ्तार किया है। सीसीटीवी के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। इस मामले में किसी ने शिकायत नहीं की है।

नियम समानता का अधिकार का उल्लंघन
ग्रेटर नोएडा, नोएडा की कई सोसाइटी में बैचलर्स को फ्लैट देने को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है। कई सोसाइटी ने अपने स्तर पर नियम बना रखे हैं कि फ्लैट सिर्फ परिवार वालों को ही किराये पर दिए जाएंगे। उनका तर्क है कि बैचलर्स के आने से सोसाइटी में शांति व्यवस्था भंग होती है। आए दिन पार्टियां, तेज म्यूजिक, पार्किंग विवाद जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त कोषाध्यक्ष सुशील तोमर ने बताया कि कानूनी दृष्टि से सोसाइटी ऐसा कोई नियम नहीं बना सकती जो भारतीय संविधान में किसी वर्ग के खिलाफ हो। किसी को सिर्फ इसलिए फ्लैट किराये पर न देना कि वह अविवाहित है। संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) के खिलाफ है। इसके बावजूद कई सोसाइटी में यह प्रथा लंबे समय से चली आ रही है।
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बैचलर्स को हो रही मुश्किलें
बैचलर्स को किराये पर फ्लैट नहीं देने के नियमों के चलते शहर में पढ़ाई, नौकरी या अन्य कारणों से आए युवाओं को रहने की भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। फ्लैट ढूंढना मुश्किल हो जाता है और मजबूरन उन्हें ऊंचे किराए पर पीजी या हॉस्टल में रहना पड़ता है। कुछ लोग फर्जी कागजों के जरिये या परिवार के नाम पर फ्लैट किराए पर लेने का भी प्रयास करते हैं। जिससे सोसाइटी में और विवाद बढ़ जाते हैं।
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