हालांकि, कुछ देर बाद विपक्ष के सदस्य लौट आए।उल्लेखनीय है कि दोनों पक्षों में सहमति बनाने के पीछे एक वजह नौ मार्च को पेश होने वाली जयराम सरकार का पहला बजट भी रही। दोनों ओर से अध्यक्ष को आश्वस्त किया गया कि सदन की कार्यवाही सुचारु बनाए रखेंगे।
प्रश्नकाल के दौरान दोनों ओर से शांत माहौल बनाया गया। सत्ता पक्ष ने भी आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 सदन पटल पर रखा तो विकास दर में आई गिरावट के लिए पूर्व सरकार पर कोई तीखा हमला नहीं किया। इसके बाद गैर सदस्य दिवस के तौर पर आए प्रस्तावों पर चर्चा शुरू हुई।
हालांकि, भोजनावकाश के बाद दूसरे सत्र में विपक्ष ने तेवर हमलावर कर लिए। तीसरे दिन के सत्र के बाद कांग्रेस और भाजपा के विधायक दलों ने बैठकें कीं। नौ मार्च को सरकार के रखे जाने वाले बजट को लेकर दोनों तरफ से रणनीति तैयार की गई।
विपक्ष के हमलावर रुख को देखते हुए भाजपा विधायक मुख्यमंत्री जयराम के बजट पेश होने के दौरान आक्रामक रहेगा। उधर, विपक्ष ने बजट भाषण में सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। पिछली सरकार की योजनाओं में अगर सरकार कट लगाती है तो विपक्ष सदन में हंगामा कर सकता है।