नगर निगम शिमला इस बार टॉप 50 शहरों में शामिल होने की उम्मीद कर रहा था। इसके लिए सर्वेक्षण से ठीक पहले कई कदम भी उठाए गए, लेकिन शहर में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग उठाने की योजना प्रभावी ढंग से लागू न होने और गारबेज फ्री सिटी के अंक न मिलने से शिमला टॉप 100 शहरों की लिस्ट में भी शामिल नहीं हो पाया। इस बार सर्वेक्षण के लिए भी केंद्रीय टीमें गुपचुप शिमला पहुंचीं।
शहरवासियों से फीडबैक लिया और सार्वजनिक स्थानों तथा शौचालयों का निरीक्षण कर लौट गईं। स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर हिमाचल से 54 शहरों की सूची मंत्रालय को भेजी थी। केंद्र की टीम ने शहरों का सर्वेक्षण किया। इसमें यह देखा कि केंद्र की ओर से स्वच्छता को लेकर जो दिशा-निर्देश जारी किए हैं, क्या शहर उन पर खरे उतर पाए हैं? इसके अलावा शहरों में विकास कार्यों के लिए जारी राशि का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं।
स्वच्छता सर्वेक्षण छावनी बोर्ड में जतोग देश भर में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। बीते वर्ष पहले स्थान पर था। इसके साथ ही डलहौजी 10वें, सबाथू 29, बकलोह 55, कसौली 21 और योल 76वें स्थान पर रहा। उत्तरी जोन के 20 शहरों में बद्दी की स्थिति बेहतर है।
बद्दी 411, हमीरपुर 495, सुंदरनगर 520, पालमपुर 577, डलहौजी 622, नयनादेवी 642, परवाणू 671, कांगड़ा 690, रामपुर 692, चंबा 693, संतोषगढ़ 735, नाहन 738, सोलन 758, रिवालसर 774, अर्की 783 ज्वालामुखी 804, मंडी 806, नारकंडा 815, कोटखाई 817, चौपाल 832 वें स्थान पर रहा है।