अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में राज्यवर्धन सिंह राठौर
केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा यह मेरा पहला मौका है जब कानपुर आया हूं। इसके लिए मैं कानपुर वालों को धन्यवाद देता हूं। उन्होंने खेलों के महत्व पर कहा कि खेल का मैदान ही होता है जहां पर खिलाड़ी गिरकर फिर से खड़ा होना सीखता है।
उन्होंने अभिभावकों के बारे में भी कहा कि वो जब स्कूल जाते हैं तो फिजिक्स टीचर से मिलने हैं, भूगोल के टीचर से मिलते हैं पर पीटी के टीचर से नहीं मिलते हैं। जबकि खेल के मैदान में भी खिलाड़ी को काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है।
राज्यवर्धन सिंह राठौर ने बताया कि जब मैंने 1998 में शूटिंग शुरू की तब मेरी उम्र 28 साल की थी। मैंने शूटिंग राइफल कभी नहीं देखी थी। जब भी मैं स्पॉसर के लिए जाता तो मुझसे कहा जाता कि हम क्रिकेट को स्पांसर दे देंगे पर आपको नहीं दे सकते, तब मैंने अमेरिका में एक दोस्त को मेल किया और कहा कि यहां हालात अच्छे नहीं है, परिस्थितियां अच्छी नहीं हैं।
उसने मुझे जो जवाब दिया उसने मुझें बहुत प्रेरित किया। उस मेल में कहा था कि आपके हालात हमेशा बदलते रहेंगे, उतार-चढ़ाव लगे रहेंगे पर इन हालात में आपके निर्णय जो होंगे उसी के अनुसार आपका भविष्य होगा। इसलिए हालात ज्यादा मायने नहीं रखते, जज्बा मायने रखता है।