भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल शनिवार को अलवर दौरे पर पहुंचे। उनके दौरे का मुख्य उद्देश्य रामगढ़ उपचुनाव और सदस्यता अभियान को लेकर पार्टी में सामंजस्य स्थापित करना है। अलवर जिले के नेताओं के बीच चल रहे आपसी मतभेदों को सुलझाना और उपचुनाव के लिए एक मजबूत रणनीति तैयार करना अग्रवाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
विधायक जुबेर खान के निधन के बाद खाली हुई जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट पर जल्द ही उपचुनाव होने हैं। यह सीट हमेशा से हिंदू और मुस्लिम वोट बैंक के आधार पर राजनीति का केंद्र रही है। 2023 में कांग्रेस के जुबेर खान ने भाजपा के बागी सुखवंत सिंह को हराकर यह सीट जीती थी, जबकि भाजपा के उम्मीदवार जय आहूजा तीसरे स्थान पर रहे थे। अब इस उपचुनाव में भाजपा के लिए सही उम्मीदवार का चयन एक कठिन कार्य है।
इस दौड़ में भाजपा बागी सुखवंत सिंह टिकट के लिए दावेदार बने हुए हैं, वहीं पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा भी चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। उनके भतीजे जय आहूजा पिछले चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार रह चुके हैं, इनके भी प्रयास जारी हैं। इसके अलावा अलवर के पूर्व विधायक बनवारीलाल सिंघल भी रामगढ़ से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। सिंघल का कहना है कि वे रामगढ़ के ही निवासी हैं और इस सीट से उनका विशेष नाता है।
प्रदेश प्रभारी के लिए इन सभी नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करना और उन्हें एकजुट करना अहम है। साथ ही अलवर सांसद और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की राय को दरकिनार करना भी भाजपा के लिए संभव नहीं होगा।
अलवर की 11 विधानसभा सीटों पर 80 हजार नए सदस्य बने हैं, जो पार्टी के सदस्यता अभियान के लिए चिंता का विषय है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और राज्य सरकार के एक मंत्री अलवर से आते हैं लेकिन आपसी खींचतान के कारण यह जिला पिछड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की यहां से बढ़ती लोकप्रियता भी भाजपा के लिए एक चुनौती बनकर उभरी है।
प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल के इस दौरे में पार्टी की आपसी खींचतान को दूर करने और उपचुनाव में सफलता सुनिश्चित करने की कोशिशें निर्णायक साबित होंगी। रामगढ़ उपचुनाव भाजपा के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी, जिसमें संगठन की एकजुटता और सही उम्मीदवार का चयन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।