पत्रवार्ता को संबोधित करते मोहन मरकाम
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राजीव भवन जगदलपुर में पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी की अपीलों को देशवासियों के जख्मों पर नमक डालने जैसा बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दो माह से डीजल, पेट्रोल, गैस संकट और महंगाई से जूझ रहे लोगों से प्रधानमंत्री ने उर्वरक कम उपयोग करने, घर से काम करने, खाद्य तेल व गैस कम उपयोग करने की सलाह दी है। उन्होंने महिलाओं से सोना न खरीदने और लोगों से विदेश यात्रा न करने की अपील भी की।
मरकाम ने आरोप लगाया कि देश में सात साल से उर्वरकों की कमी है, फिर भी प्रधानमंत्री यूरिया खपत कम करने को कह रहे हैं। किसानों की आय दोगुनी करने का वादा टूटा, वे कर्जदार हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ को 15 लाख मीट्रिक टन उर्वरक चाहिए, पर सिर्फ 51 हजार मीट्रिक टन ही पहुंचा है, जो 30 फीसदी है। "घर से काम" की सलाह फील्ड वर्कर के लिए अव्यावहारिक है। मोदी राज में किचन का बजट बिगड़ा है। खाद्य सामग्री के दाम बहुत बढ़े हैं।
महंगाई और सरकारी खर्च पर सवाल
गृहिणियां हर चीज के बजट में कटौती कर रही हैं। 2013 में सोने की कीमत 28500 से 29600 रुपये प्रति ग्राम थी, जो 2026 में 152130 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। यह 12 साल में 50 गुना महंगा हुआ है। मरकाम ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने 70 देशों की विदेश यात्रा पर 815 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और 300 से अधिक दिन विदेशों में बिताए हैं। उनके निजी विमान की कीमत 8400 करोड़ रुपये है।
ईंधन की कीमतों में वृद्धि और जनता पर बोझ
मोदी सरकार बनने के बाद पेट्रोल के दाम 70 रुपये से बढ़कर 100 रुपये प्रति लीटर के पार हो गए हैं। डीजल के दाम 55 रुपये से बढ़कर 95 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गए हैं। बीते 12 साल में पेट्रोलियम उत्पादों पर कर लगाकर जनता की जेब से 47 लाख करोड़ रुपये निकाले गए हैं। जब कच्चा तेल 19 डॉलर प्रति बैरल था, तब भी पेट्रोल-डीजल 100 रुपये में बिक रहा था। अब कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल होने पर भी प्रधानमंत्री जनता को राहत देने के बजाय ईंधन बचाने की अपील कर रहे हैं, जबकि छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में हफ्तों से डीजल-पेट्रोल की कमी है, जिससे कमर्शियल गैस न मिलने के कारण राज्य के अधिकांश स्टील उद्योग बंद पड़े हैं।