आरएसएस नेता जगदीश गगनेजा पर जालंधर में गोलीबारी
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आरएसएस नेता जगदीश गगनेजा की हत्या का सुराग ढूंढते हुए पंजाब पुलिस ने एक बहुत बड़ा काम किया था, लेकिन हाथ खाली ही रहे। पुलिस ने हत्यारोपियों का पता लगाने के लिए एक करोड़ मोबाइल कॉल खंगाल दिए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली। पिछले दिनों लुधियाना में एक अन्य हिंदू नेता अमित कुमार की हत्या के मामले में पंजाब पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं।
खास बात यह है कि गगनेजा और अमित की हत्या में अपराधियों ने एक जैसे तरीके से वारदात को अंजाम दिया था। इसे देखते हुए जांच टीम अमित कुमार हत्याकांड में घटनास्थल के करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में लगे सीसीटीवी के फुटेज खंगालने के साथ ही उक्त क्षेत्र में घटना के समय एक्टिव मोबाइल फोनों की करीब दस हजार कॉल्स की जांच कर चुकी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गगनेजा हत्याकांड में अपराधियों का पता नहीं लगा पाने के बाद इस मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द कर दी गई है और छह महीने से सीबीआई भी इस मामले में अब तक कुछ कर नहीं पाई है।
पता चला है कि गगनेजा हत्याकांड केअलावा माता चंद कौर की हत्या के मामले सीबीआई को इसलिए भी सौंपे गए क्योंकि पंजाब सरकार प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान इन हत्याओं को विपक्ष द्वारा मुद्दा बना लिए जाने की आशंका थी, लेकिन इन हत्याओं के बाद हिंदू नेता अमित कुमार की हत्या ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पंजाब सरकार को फिर से कठघरे में खड़ा कर दिया है।
हिन्दू नेता अमित कुमार मर्डर भी गगनेजा केस से जुड़ा
लुधियाना में हिन्दू नेता की गोलियां मारकर हत्या
अमित कुमार हत्याकांड की जांच कर रही टीमें इस बात को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही हैं कि गगनेजा और अमित की हत्या का तरीका मेल खा रहा है।
जिस तरह आरएसएस नेता गगनेजा की हत्या को बाइक सवार दो लोगों ने गोली मारकर की थी, ठीक उसी तरह दो बाइक सवारों ने भी अमित कुमार की हत्या को अंजाम दिया था। इस बीच, पटियाला की श्री हिंदू तख्त संस्था ने आरोप लगाया है कि अमित कुमार श्री हिंदू तख्त के वरिष्ठ प्रचारक थे और कट्टरपंथियों की ओर से उन्हें धमकियां मिल रही थीं।
तख्त के प्रचारक राजेश केहर, राज पासी और नीरज चोपड़ा का कहना है कि अमित कुमार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए श्री हिंदू तख्त ने पंजाब के डीजीपी को पत्र लिखा था, जिस पर डीजीपी ने लुधियाना के कमिश्नर को अमित कुमार को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद कमिश्नर ने अमित कुमार को सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई और वे आतंकियों की गोली का शिकार हो गए।