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अब फायर ब्रिगेड, पुलिस और एंबुलेंस के लिए सिर्फ एक नंबर, जानिए कब से मिलेगी सुविधा

Thu, 18 Jan 2018 08:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मंडी
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हिमाचल में अब इमरजेंसी सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए सरकार नई पहल करने जा रही है। इसके तहत अब फायर ब्रिगेड, पुलिस और एंबुलेंस सहित अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबर डायल नहीं करना पड़ेगा। 

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देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल में 100 दिन के भीतर एक ही नंबर पर इमरजेंसी सेवाएं मिलना शुरू हो जाएंगी। फायर ब्रिगेड, पुलिस, एंबुलेंस सहित सभी आपातकाल सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबर डायल करने की बजाय 112 नंबर मिलाना होगा। 

सरकार ने इस सेवा को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है। केंद्र सरकार ने पांच करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी हैं। टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि, अभी भी 112 पर कॉल की जा रही हैं लेकिन इस नंबर को 100 नंबर पर डायवर्ट किया गया है।

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विशेष कॉल सेंटर बनेगा

पुलिस हेडक्वार्टर में एसपी (कानून एवं व्यवस्था) कुशाल शर्मा ने बताया कि नेशनल इमरजेंसी रिस्पांड सिस्टम (एनईआरएस) के तहत प्रदेश में इस योजना को शुरू किया जा रहा है। 100 के स्थान पर 112 नया नंबर होगा और उस पर कॉल करके पुलिस, एंबुलेंस और फायर से संबंधित सहायता ली जा सकेगी।

इस सिस्टम के शुरू होने से फोन अंगेज होने की समस्या का भी समाधान हो जाएगा। इस नंबर पर एक समय में एक हजार से भी अधिक लोग बात कर सकेंगे। यदि इसमें आपदा के समय अधिक कॉल आने लग जाएंगी तो यह ऑटोमेटिड आंसर सिस्टम पर कॉल को डायवर्ट कर देगा। इससे बिना कॉल सेंटर बात किए व्यक्ति की लोकेशन के आधार पर नजदीकी पुलिस थाना, चौकी या पुलिस कर्मी को कॉल ट्रांसफर हो जाएगी।

108 एंबुलेंस सेवा की तर्ज पर इस व्यवस्था के लिए सूबे में विशेष कॉल सेंटर बनेगा। जहां एक समय में सैकड़ों लोग एक साथ कॉल कर पाएंगे। एनईआरएस से यह सब संभव होगा। वर्तमान में पुलिस सहायता के लिए 100, एंबुलेंस के लिए 108 और दमकल विभाग से मदद लेने के लिए 101 फोन नंबर पर सहायता मिलती है। 
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ऐसे दुरुस्त होगा सिस्टम

सारी व्यवस्था एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से होगी। योजना के तहत प्रत्येक पुलिस थाना और चौकियों की गाड़ियों में एक टैब लगाया लगाएगा। इसमें इस सॉफ्टवेयर की एप्लीकेशन इंस्टाल होगी। साथ ही पुलिस कर्मियों के मोबाइल फोन पर भी इस एप को इंस्टाल किया जाएगा।

जैसे ही मदद मांगने वाला 112 पर कॉल करेगा तो कॉल सेंटर पर उसकी लोकेशन दिख जाएगी। कॉल सेंटर से मदद मांगने वाले की लोकेशन के नजदीकी पुलिस थाना, चौकी या कर्मी से संपर्क साधा जाएगा और तत्काल मदद पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। यदि मदद मांगने के बाद नंबर बंद भी हो गया तो लोकेशन ट्रेस हो सकेगी।
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