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'डिप्टी सीएम हैं दामाद, फिर भी हमारे घर में अंधेरा'

Fri, 02 Jun 2017 08:41 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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केशव प्रसाद मौर्या (फाइल फोटो)
दामाद हमारा डिप्टी सीएम, फिर भी हमारे घर में अंधेरा... यह दर्द है उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के ससुराल का है जो आज भी अंधेरे में गुजारा कर रहा है।  सुनकर आपको भी अचरज हुआ न... यहां क्यों अंधेरा पसरा है जानना नहीं चाहेंगे..?     
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केशव प्रसाद मौर्य का ससुराल
केशव मौर्य के गृह जनपद कौशांबी के खूझा गांव में उनकी ससुराल है। लेकिन इस गांव की बदहाल स्थिति विकास कार्यों की पोल खोल रही है। इस गांव में आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी अंधेरा ही अंधेरा है। सरकार ने भले की पंडित दीनदयाल ग्रामीण ज्योति योजना के तहत गांव-गांव बिजली पहुंचाने का ऐलान किया हो, लेकिन इसे केशव मौर्य के ससुरालियों की बदनसीबी ही कहेंगे कि विद्युत विभाग की तरफ से विद्युतीकरण की लिस्ट में भी खूझा गांव का नाम नहीं है।

 
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केशव प्रसाद मौर्य का ससुराल
सिराथू, जहां से केशव प्रसाद मौर्य विधायक रह चुके हैं, वहां से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर खूझा गांव है। 300 सौ से अधिक आवादी वाले इस गांव में आजादी के बाद से अब तक लोगों को बिजली नहीं नसीब हुई। खूझा गांव के लोगों को बड़ी उम्मीदें थी कि इस गांव का दामाद केशव मौर्य प्रदेश का डिप्टी सीएम है, अब उनके गांव में बिजली के साथ-साथ विकास बयार भी बहेगी, लेकिन उनकी यह उम्मीदें महज एक सपना ही साबित हो रही हैं।

 

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धूल फाखते कूलर
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सास राम दुलारी ने भी इस बात को माना कि उनके दामाद उप मुख्यमंत्री हैं और उनके गांव में बिजली नहीं है। वहीं इस मामले अधिकारीयों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि खूझा गांव में बिजली नहीं है।
   
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केशव प्रसाद मौर्य के ससुराल का हाल
बिजली ही नहीं आधुनिक युग मे बदहाली का दंश झेल रहा खूझा गांव के लोग शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत पीछे हैं। गांव के बच्चे ढ़िबरी के सहारे पढ़ाई लिखाई तो जरूर करते है, पर उनके भविष्य पर बिजली की कमी कुंडली मार कर बैठी है।  
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केशव प्रसास मोर्य का ससुराल
विकास की राह में कोसो दूर खड़ा खूझा गांव के लोगों के लिए बिजली की कमी कितना सताती है इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। इस भीषण गर्मी में लोगों का बुरा हाल है। दहेज में मिला टीवी, फ़्रिज, कूलर आदि आधुनिक समान कूड़े की तरह एक कोने में पड़े हैं।
 
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सौर उर्जा से बिजली का होता है जुगाड़
गांव के लोग बताते है कि खूझा गांव में बहन बेटियों की शादी भी बामुश्किल हो पाती है। गांव में जिन लोगों की आर्थिक स्तिथी ठीक है वो तो गेस्ट हाउस से शादी विवाह कर लेते है लेकिन जो गरीब तबके के लोग है उनके बहन बेटियों की डोली आज भी पेट्रोमैक्स यानी कि गैस की रोशनी में उठती है।पेट्रोमैक्स के अलावा अगर इस गांव में बिजली का कोई साधन है तो वो है एकाध सोलर पैनल। जिसके सहारे शाम को रोशनी हो जाती होगी।
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