23 जुलाई के बाद वर्ष 2018 में कोई भी शुभ विवाह मुहूर्त नहीं होगा। चातुर्मास, गुरु ग्रह अस्त होने और खरमास के चलते 15 जनवरी 2019 के बाद मांगलिक कार्य शुरू हो पाएंगे।
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आचार्य डॉ. आदित्य पांडेय का कहना है कि सनातन धर्म में भगवान विष्णु के पूजन का विशेष महत्व है। ऐसे में जब विष्णु क्षीर सागर में रहते हैं, उस चार महीने के समय को हम चातुर्मास कहते हैं। इस दौरान सभी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित हो जाते हैं।
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इस वर्ष 23 जुलाई 2018 को देवशयनी एकादशी होगी और चातुर्मास शुरू हो जाएंगे। इसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित हो जाएंगे। 19 नवंबर 2018 को देवोत्थान एकादशी के साथ चातुर्मास खत्म हो जाएंगे। इसके बाद भी मांगलिक कार्यक्रम प्रारंभ नहीं हो पाएंगे क्योंकि गुरु ग्रह अस्त रहेंगे।
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आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री का कहना है कि गुरु 12 नवंबर 2018 को अस्त हो जाएंगे। इसके बाद 10 दिसंबर को 2018 को उदय होंगे। ऐसे में देव गुरु बृहस्पति की पूजा के बिना कोई भी विवाह कार्यक्रम नहीं किया जा सकता है।
10 से 15 दिसंबर तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। 15 दिसंबर को खरमास प्रारंभ हो जाएगा जो कि 15 जनवरी 2019 तक चलेगा। ऐसे में विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं होगा। कारण है कि खरमास में भी मांगलिक कार्यक्रम नहीं होते हैं।