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नमो ड्रोन दीदी का ड्रोन एक एकड़ में भी नहीं कर पाया नैनो यूरिया का छिड़काव

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28jjrp08- सरकार की तरफ से दिया गया ड्रोन। स्रोत : परिजन - फोटो : संवाद
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साल्हावास। कृषि क्षेत्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है।
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योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराकर खेतों में नैनो यूरिया के छिड़काव को बढ़ावा देना था लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत हैं। अकहेडी मदनपुर में पूनम के जय माता दी समूह की महिलाओं को आठ लाख रुपये की लागत से इफको जैसी संस्थाओं के सहयोग से ड्रोन भी दिया गया और प्रशिक्षण भी।
साथ ही प्रशासन ने ड्रोन उड़ाने का लाइसेंस भी दिया था लेकिन इसे चलाने के लिए साधन पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं करवाए गए। इस कारण यह नमो दीदी ड्रोन शोपीस बनकर रह गया है। अब तक उन्होंने एक एकड़ में भी नैनो यूरिया का छिड़काव ड्रोन से नहीं किया है। अकहेडी मदनपुर निवासी पूनम का कहना है उन्हें दो बैटरियों की आवश्यकता थी लेकिन उन्हें एक बैटरी ही दी गई।
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साथ ही उनके पास इसे ले जाने और लाने के वाहन की जरूरत होती क्योंकि ड्रोन को खेतों में बिना वाहन के ले जाना असंभव है। उनके यहां पर 2 साल से यह ड्रोन एक बक्से में बंद करके रखा गया है क्योंकि बिना बैटरी के ना तो यह चार्ज हो पता है और ना ही बिना वाहन इसको एक जगह से दूसरी जगह ले जाना संभव होता है।
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किसानों को भी नहीं जानकारी


एक एकड़ में भी ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया का छिड़काव नहीं कर पाई और न हीं किसानों का भरोसा बन पाई। आसपास के किसानों को तो यह भी पता नहीं है कि उनके गांव में ड्रोन है। किसान धर्मेंद्र, राज सिंह का कहना है कि उन्होंने तो आज तक ड्रोन को देखा तक नहीं है कि गांव में ड्रोन है। वे तो प्रवासी मजदूरों को 50 टंकी के हिसाब से देकर यूरिया का छिड़काव करवाते हैं।



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प्रभावशाली डेमो सिस्टम नहीं ला पा रहीं ड्रोन दीदी

सही मायने में ड्रोन से नैनो यूरिया छिड़काव और इसके बाद फसल पर उसके परिणाम का प्रभावी सैंपल या डेमो सिस्टम विकसित नहीं किया जा सका। जब तक यह सिस्टम नहीं लाया जाएगा तब तक किसानों को नई तकनीक पर विश्वास नहीं हो सकेगा। समय रहते प्रदर्शन और प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत की जाती तो स्थिति कुछ बेहतर हो सकती थी।



क्या है ड्रोन दीदी योजना

ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वर्ष 2023-24 से यह योजना शुरू की गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं का चयन कर पहले ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद सब्सिडी पर ड्रोन दिया जाता है। इसके बाद किसानों से संपर्क कर उनके खेतों में ड्रोन के जरिए कीटनाशक व उर्वरक का छिड़काव करती हैं।
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