रियासत सरकार में गठबंधन सहयोगी दलों पीडीपी और भाजपा में विभिन्न मुद्दों पर मतभेद गहराने से दोनों दलों के सुर अपना वोट बैंक बचाने की चिंता में बदलने लगे हैं। संविधान के अनुच्छेद 35ए में किसी तरह की छेड़छाड़ करने पर राज्य में तिरंगे की हिफाजत कोई भी नहीं कर पाने के मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बयान के अलावा एनआईए जांच में नप रहे अलगाववादियों के मामले में पीडीपी की खामोशी से भाजपा नाराज है। वहीं पीडीपी अब कश्मीर केंद्रित सियासत की लाइन पर चल अपने मतदाताओं में जगह बनाए रखना चाहती है।
भाजपा और पीडीपी ने करीब ढाई सालों में गठबंधन धर्म पर चलते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया कि दोनों पार्टियों में वैचारिक मतभेदों के बावजूद गुड गवर्नेंस के एजेंडे पर गठबंधन हुआ है, लेकिन कश्मीर में बदल रहे हालात व नेकां के बढ़ रहे जनाधार खासतौर से श्रीनगर लोकसभा सीट से डा. फारूक अब्दुल्ला की जीत के बाद पीडीपी ने कश्मीर केंद्रित राजनीति के एजेंडे की अपनी लाइन पकड़ ली है।
भाजपा ने मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी के माध्यम से मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बयान पर सीधा निशाना करते हुए अनुच्छेद 35ए पर मुख्यमंत्री के बयान को राजनीतिक तौर पर गलत और सही स्थिति को बयान न करने वाला बताते हुए इस अनुच्छेद को रियासत के लिए नुकसानदायक बता दिया है।