राज्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले कंप्यूटर बाबा ने सरकार पर धर्म की उपेक्षा के आरोप लगाए। जिसके बाद राज्य में दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के नेताओं में साधु-संतों का समर्थन हासिल करने की होड़ लग गई है।
कंप्यूटर बाबा ने कहा, "शिवराज सिंह चौहान धर्म के ठीक विपरीत हैं और धर्म का कुछ काम करना ही नहीं चाहते हैं। उनकी धर्म के प्रति उदासीनता को देखते हुए मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।"
मध्य प्रदेश में इस बयान को भाजपा हल्के में नहीं ले सकती। प्रदेश में बाबाओं और संत समाज का अहम स्थान है। यहां संतों का जनता पर बहुत प्रभाव है। जिसकी वजह से कोई भी राजनीतिक पार्टी इनकी उपेक्षा करने का जोखिम नहीं उठा सकती। शिवराज सिंह चौहान और भाजपा को कंप्यूटर बाबा के आरोपों पर जनता को जवाब देना पड़ेगा।
एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ 4 बड़े साधु-संतों ने मोर्चा खोला
राज्य में नेता बाबाओं का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं और चुनाव से पहले उनका समर्थन हासिल करना चाहते हैं। हाल ही में शिवराज ने मालवा-निमाड़ में मजबूत पकड़ रखने वाले कथावाचक कमलकिशोर नागर से मिले थे। 14 अक्टूबर को भाजपाध्यक्ष अमित शाह खजुराहो में आचार्य विद्यासागर जी के दर्शन करने जा रहे हैं।
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर अलग पार्टी बनाकर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। इनके अलावा दद्दा जी और पंडोखर सरकार के यहां मंत्री-नेताओं का आना-जाना लगा है। इन सभी संतों ने किसी राजनीतिक दल के पक्ष में खुलकर कभी कोई बयान नहीं दिया और अपना मत हमेशा रखते रहे हैं। एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ चार बड़े साधु-संतों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
आइए जानते हैं इस मध्य प्रदेश की सियासत में दखल रखने वाले इन साधु-संतों के बारे में :
कंप्यूटर बाबा
कंप्यूटर बाबा ने राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है जिसके बाद वे फिर चर्चा में हैं।
वे दिगंबर अखाड़ा और रामानंद संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं। भाजपा के कई नेता उनके करीबी माने जाते हैं।
चुनाव से ठीक पहले सरकार में मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने कहा, "अब किसी सरकार पर कोई भरोसा नहीं रहा। संतों की लड़ाई खुद संत समाज लड़ेगा।"