लश्कर-ए-तैयबा ने कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों के काफिले के रूट वाले नेशनल हाईवे पर मृत्यु जाल बुन लिया है। सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि लश्कर का कमांडर अबू दुजाना सेना और सीआरपीएफ के कानवाय पर लगातार हो रहे हमले में स्थानीय युवकों का इस्तेमाल करता है।
लश्कर ने इसके लिए स्थानीय आतंकियों के बीस ग्रुप बनाए हैं। हर ग्रुप में चार आतंकी है। अनंतनाग के बिजबिहाड़ा से पांपोर तक हाईवे पर सुरक्षा बलों के कानवाय पर छह हमले हो चुके हैं।
हर हमले के बाद विशेष कार्ययोजना बनती रही है लेकिन योजना पर अमल धरातल पर दिखती नहीं है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से अब तक लश्कर ने 95 स्थानीय युवकों की भर्ती की है।
आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्लान तैयार
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- फोटो : Amar Ujala
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक लश्कर -ए -तैयबा के सरगना हाफिज सईद के दामाद खालिद वलीद हर हमले के पीछे मास्टरमाइंड रहा है। सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल के लिए फिर से एक्शन प्लान तैयार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां अबू दुजाना की तलाश में लगातार अभियान चला रही है।
आतंकियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए गांवों में भी सर्च आपरेशन चलाने का निर्णय लिया गया है। लश्कर आतंकियों को इस इलाके में स्थानीय संरक्षण भी मिलता रहा है।
सीआरपीएफ काफिले पर जून में हुए हमले में 8 जवानों के शहीद और 22 के घायल होने के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की उच्चस्तरीय बैठक के बाद केंद्रीय टीम ने इलाके का दौरा किया था। तब डेथ ट्रेप के संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सीसीटीवी कैमरे लगाने और हाईवे पर सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया। इस निर्णय को अब तक लागू नहीं किया जा सका।
सीआरपीएफ के लिए 355 नए बुलेट प्रुफ वाहन
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- फोटो : Amar Ujala
तीन दिन पहले आतंकियों द्वारा पुरानी तकनीक से किए गए हमले में फिर तीन जवान शहीद हो गए। आतंकी हिट एंड रन की तकनीक का इस्तेमाल करते हुए भागने में भी सफल हो रहे हैं। ताजा हमले के बाद सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के आला अधिकारियों की बैठक में एक बार फिर नया एक्शन प्लान बनाया गया है।
केंद्र सरकार ने सीआरपीएफ के लिए 355 नए बुलेट प्रूफ वाहनों की मंजूरी दी है लेकिन वाहन अब तक घाटी नहीं पहुंचे हैं। सुरक्षा बलों को काफिले के लिए बख्तरबंद वाहनों की संख्या पर्याप्त नहीं है। काफिले में अब तक साधारण बसों और ट्रकों का इस्तेमाल हो रहा है। अब फिर से रोड ओपनिंग पार्टी द्वारा निगरानी के अलावा सुरक्षा एजेंसियों में तालमेल के लिए नई रणनीति बनाई गई है।