संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की अदालत ने 55 लाख रुपये के लेनदेन से जुड़े चेक बाउंस मामले में आरोपी दीपक मलिक को बरी कर दिया। अदालत ने निचली अदालत द्वारा 5 अक्टूबर 2019 को सुनाई गई दो वर्ष की सजा तथा 10 अक्टूबर 2019 को पारित सजा संबंधी आदेश को भी रद्द कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, बहादुरगढ़ निवासी दीपक मलिक के खिलाफ लोवा खुर्द निवासी कुलदीप सिंह ने शिकायत दायर की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि दोनों के बीच मित्रता थी और उसने 5 दिसंबर 2011 को संपत्ति खरीदने के लिए आरोपी को 55 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी। इसके बदले आरोपी ने 19 लाख और 36 लाख रुपये के दो पोस्ट-डेटेड चेक दिए थे।
इनमें से 36 लाख रुपये का चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने मामला दर्ज कराया। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कारावास और 50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ आरोपी ने अतिरिक्त सत्र अदालत में अपील दायर की।
अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने 55 लाख रुपये देने के उद्देश्य को लेकर अलग-अलग बयान दिए। शिकायत में उसने राशि नकद आर्थिक सहायता के रूप में देने की बात कही, जबकि गवाही के दौरान उसने कहा कि यह रकम संपत्ति की बिक्री के बदले देय थी।
अदालत ने यह भी पाया कि संबंधित संपत्ति की रजिस्ट्री में बिक्री मूल्य 19.12 लाख रुपये दर्ज था, जबकि शिकायतकर्ता 55 लाख रुपये की देनदारी का दावा कर रहा था। 36 लाख रुपये के चेक की राशि भी रजिस्ट्री में दर्ज मूल्य से मेल नहीं खाती थी। शिकायतकर्ता 55 लाख रुपये के स्रोत को साबित नहीं कर सका और न ही उसने इस राशि का उल्लेख अपने आयकर रिटर्न में किया था। इसके अलावा, जिस संपत्ति की बिक्री का हवाला दिया गया, उसकी रजिस्ट्री आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच नहीं, बल्कि दोनों की माताओं के बीच हुई थी।
इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ कोई कानूनी देनदारी सिद्ध नहीं हुई। परिणामस्वरूप अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए दीपक मलिक को आरोपों से बरी कर दिया तथा निचली अदालत के दोनों आदेश रद्द कर दिए।