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कश्मीर हिंसा ने महिलाओं को डिप्रेसन में डाला

Tue, 30 Aug 2016 12:11 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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कश्मीर के नागरिक - फोटो : BBC
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कश्मीर में चल रही अशांति ने महिलाओं और युवतियों को मानसिक तनाव का शिकार बना दिया है। हालांकि इसमें हर एक वर्ग शामिल है, लेकिन सबसे ज्यादा असर महिलाओं, युवतियों और छोटी बच्चियों पर पड़ा है।
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बंद कमरे में गुजर रही जिंदगी से महिलाएं और युवतियां तनाव में हैं। ऐसे माहौल ने उन्हें चिड़चिड़ा बना दिया है। यही नहीं, पेलेट गन से घायल हुई महिलाएं एवं युवतियां डिप्रेशन में हैं। राज्य महिला आयोग ने हिंसा के बीच जिंदगी बसर कर रही महिलाओं की पड़ताल की तो यह सब सामने आया।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नईमा अमहद मेहजूर का कहना है कि जहां भी जा रहे हैं, वहीं महिलाओं और युवतियों का अलग ही बर्ताव देखने को मिल रहा है। वह बात करने की जगह लड़ाई करने पर उतर आती है। इसका असर सिर्फ उन पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवार पर पड़ रहा है। जरा-जरा सी बात पर पारिवारिक झगड़े हो रहे हैं। महिलाओें को ऐसे माहौल से निकालना होगा। 
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घरेलू हिंसा के मामलों के निपटारे लटके

kashmir - फोटो : PTI
आयोग ने तय किया है कि हालात सामान्य होने पर महिलाओं और युवतियों के तनाव को कम करने के लिए कुछ विशेष कदम उठाए जाएंगे। मेहजूर का कहना है कि पेलेट गन से भी काफी महिलाएं घायल हुई हैं। इसका उनके मानसिक संतुलन पर गहरा असर पड़ा है।

आयोग ने इन महिलाओं की सूची तैयार की है। पेलेट गन से घायल होने वाली करीब 300 महिलाएं एवं युवतियां हैं, जो डिप्रेशन का शिकार हो रही हैं। इनके लिए आयोग शारीरिक, मानसिक और आर्थिक मदद करने की योजना बना रहा है। इसके लिए यदि सरकार से फंड लेना पड़ेगा तो भी लिया जाएगा। 

कश्मीर हिंसा का असर महिलाओं की जिंदगी को खासा प्रभावित कर रहा है। राज्य महिला आयोग के पास घरेलू हिंसा का निपटारा करने के लिए कई मामले हैं। ऐसे ही 30 मामलों को लगभग निपटा लिया गया था, लेकिन इन मामलों की सुनवाई के लिए कोई पहुंच ही नहीं पाया। 
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