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'मुजफ्फरनगर दंगे की जांच रिपोर्ट मेरे जीवन का सबसे मुश्किल जजमेंट'

सार

  • मेरी रिपोर्ट का आधार 377 पब्लिक और 101 सरकारी गवाहों के बयान हैं।
  • अभी केवल एक्शन टेकन रिपोर्ट रखी गई है।
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जस्टिस विष्णु सहाय - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मुजफ्फरनगर दंगा जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विष्णु सहाय मुजफ्फरनगर व शामली में हुए दंगों और आसपास के जिलों में सांप्रदायिक तनाव की जांच रिपोर्ट को अपने जीवन का सबसे मुश्किल जजमेंट मानते हैं। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट पब्लिक और सरकारी गवाहों के बयानों का निष्कर्ष है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस विष्णु सहाय ने सोमवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि राज्यपाल ने उन्हें चार बिंदुओं पर जांच सौंपी थी। यह बहुत संवेदनशील मुद्दा था।

रिपोर्ट लिखने के दौरान हमेशा मेरे दिमाग में यह बात रही कि चारों बिंदुओं पर पूरी ईमानदारी के साथ इसे तैयार किया जाए। उन्होंने कहा, मेरी रिपोर्ट का आधार 377 पब्लिक और 101 सरकारी गवाहों के बयान हैं।
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उनके बयानों से जो निष्कर्ष निकला, रिपोर्ट उसी पर आधारित है। 775 पन्नों की रिपोर्ट मेरे जीवन का सबसे मुश्किल जजमेंट था। मैंने इसका एक ही आधार रखा, गवाहों के बयान।
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फिर न हों ऐसे दंगे इसके लिए दिए गए सुझाव

पुलिस कर्मियों के साथ दंगा पीड़ित मुस्लिम - फोटो : getty images
जस्टिस सहाय ने कहा कि रिपोर्ट के चौथे भाग में मुजफ्फरनगर जैसे दंगों की भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने के लिए विस्तार से सुझाव दिए गए हैं।

जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए इसके बारे में मेरा कुछ भी कहना मर्यादा के खिलाफ होगा। अभी केवल एक्शन टेकन रिपोर्ट रखी गई है।

इन बिंदुओं पर की जांच
घटनाओं के संबंध में तथ्यों को देखना, उन कारणों का पता लगाना जिनसे हिंसक घटनाएं हुईं। स्थिति को संभालने के लिए अधिकारियों के प्रयासों व उपायों के औचित्य का परीक्षण। घटनाओं के संबंध में उत्तरदायित्व और उसकी सीमा का निर्धारण करना। भविष्य में घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुझाव देना।
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