मुजफ्फरनगर दंगा जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विष्णु सहाय मुजफ्फरनगर व शामली में हुए दंगों और आसपास के जिलों में सांप्रदायिक तनाव की जांच रिपोर्ट को अपने जीवन का सबसे मुश्किल जजमेंट मानते हैं। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट पब्लिक और सरकारी गवाहों के बयानों का निष्कर्ष है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस विष्णु सहाय ने सोमवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि राज्यपाल ने उन्हें चार बिंदुओं पर जांच सौंपी थी। यह बहुत संवेदनशील मुद्दा था।
रिपोर्ट लिखने के दौरान हमेशा मेरे दिमाग में यह बात रही कि चारों बिंदुओं पर पूरी ईमानदारी के साथ इसे तैयार किया जाए। उन्होंने कहा, मेरी रिपोर्ट का आधार 377 पब्लिक और 101 सरकारी गवाहों के बयान हैं।
उनके बयानों से जो निष्कर्ष निकला, रिपोर्ट उसी पर आधारित है। 775 पन्नों की रिपोर्ट मेरे जीवन का सबसे मुश्किल जजमेंट था। मैंने इसका एक ही आधार रखा, गवाहों के बयान।