एक ओर जहां सारे सरकारी इंतजाम बर्फबारी में जवाब दे गए, वहीं शिमला जिले की भौंट पंचायत में दर्द से कहराती गर्भवती महिला कामिनी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए के लिए पुलिस लाइन भराड़ी के छह जवान भगवान बनकर मदद को आगे आए। 108 और अन्य एंबूलेंस सेवा ने जब बर्फ के बीच गाड़ी भेजने से इंकार कर दिया तो इन्हीं छह जवानों ने प्रसव पीड़ा से कहरा रही कामिनी (23) को कुर्सी में डंडे बांध महिला को कंबल के बीच लपेट कर दस किलोमीटर पैदल सफर कर कमला नेहरू अस्पताल समय से पहुंचाने का कार्य किया।
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बर्फ पर दस किलोमीटर कुर्सी पर बिठा पहुंचाया अस्पताल
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इन जवानों ने गर्भवती महिला और उसके बच्चे की जान को बचाकर इंसानियत की मिसाल कायम की। सही मायने में मदद के लिए आगे आए इन जवानों के महिला को साढ़े नौ बजे अस्पताल पहुंचाने के बाद, अस्पताल में बड़ा सजेरियन ऑपरेशन हुआ। जिससे मां और बच्चे दोनों की जान सुरक्षित है। अस्पताल में महिला और उसकी नवजात बच्ची सुरक्षित है। इन छह पुलिस वालों मुख्य आरक्षी रवि, पुनीत, आरक्षी देवेंद्र मेहता, और सुनील और शिव कांत ने बिना समय गवाएं महिला को उठाकर अस्पताल पहुंचया। करीब साढ़े तीन घंटे में महिला को अस्पताल पहुंचाने की वजह से ही महिला और बच्ची की जान बच पाई।
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महिला और उसकी मां थी घर पर अकेली
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अस्पताल के चिकित्सक संदीप ने भी माना कि यदि महिला को पहुंचाने में कुछ और देर होती तो दोनों की जान भी जा सकती थी। भौंट पंचायत के प्रधान कृष्ण दत्त, पूर्व उप प्रधान मुकुं द लाल और पंचारयत समिति सदस्य लता का कहना है कि ये दोनों जिंदगियां सिर्फ इन छह जवानों के कारण ही बची है। उन्होंने कहा कि वे प्रशासन और सरकार से सही मायने में जनता की मुसीबत में मदद करने वाले जवानों को प्रोत्साहित करे और उन्हें दो दो जाने बचाने और एक पेट में पल रहे बच्चे को सुरक्षित दुनिया में लाने की एवज में पुरस्कृत करने के लिए मांग करेंगे।
मां और बच्चे दोनों की जान पर था खतरा
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इन जन प्रतिनिधियों ने कहा कि यह पूरे समाज के लिए एक मिसाल है कि कैसे पुलिस जवान जीवन रक्षक बनते है। रविवार को शाम करीब साढ़े पांच बजे गर्भवती महिला कामिनी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, उस समय घर पर कामिनी और उसकी मां सरला बिलकुल अकेली थी, पति स्वरूप भी घर से बाहर चंडीगढ़ था। सरला ने पहले लोगों से मदद मांगी, 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया, मगर रास्ता ठीक न होने और उनका वाहन कहीं और फंसे होने की बात सुनने के बाद उसके पास कोई चारा शेष नहीं था।
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police jawans
ऐसे में भराड़ी पुलिस लाइन के जवानों को जैसे ही इसका पता चला। ये छह जवान महिला की मदद के लिए आए और करीब तीन घंटे बर्फ वाले रास्ते से महिला को कुर्सी पर बिठा कर अस्पताल तक पहुुंचाने में कामयाब हुए। इन्हीं की बदोलत मां और बच्चे दोनों की जान बच गई।
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कमला नेहरू अस्पताल के चिकित्सक डा. संदीप ने माना कि महिला और बच्चे की यदि घर या रास्ते में ही डिलिवरी हो जाती तो उनकी जान को खतरा होता। जवानों की हिम्मत की बदोलत प्रसव पिड़ा से कहरा रही महिला समय से अस्पताल पहुंचाई गई।
यहां उसका ऑपरेशन प्रसव करवाया गया। अब जच्चा बच्चा दोनों की जान सुरक्षित है। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि डिलिवरी नजदीक होने के मामलों में अस्पताल से नजदीक ही रुकें , ताकि समय से गर्भवर्ती को अस्पताल पहुंचाया जा सके।