कोर्ट ने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य के मुख्य अभियंता की ओर से दायर शपथ पत्र का अवलोकन करने के बाद यह आदेश पारित किए। मुख्य अभियंता ने शपथपत्र से कोर्ट को बताया कि प्रस्तावित परियोजनाओं पर लगभग 798 करोड़ खर्च आने का अनुमान है। राज्य ने केंद्रीय जल मंत्रालय से वित्तीय सहायता मांगी है।
कोर्ट ने शपथ पत्र का अवलोकन करने के बाद कहा कि तीन जिलों हमीरपुर, कांगड़ा और मंडी के निवासियों को पीने योग्य पेयजल की आपूर्ति अपर्याप्त है। राज्य सरकार के मापदंडों के अनुसार इस तरह के 50 फीसदी आवास भी पूरी तरह से कवर नहीं हो पा रहे हैं।
दूसरे जिलों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश में सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब, पब्बर, चंद्रभागा जैसी नदियों का बहना एक वरदान स्वरूप है। राज्य की आबादी का 90 फीसदी हिस्सा ग्रामीण इलाकों में रहता है, लेकिन उन्हें भी जरूरत के अनुसार पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाता।