तमाम विवादों और किंतु-परंतु के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है।
रिकॉर्ड छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र के लिए जहां एक ओर सत्ता बचाए रखने की चुनौती है तो दूसरी ओर 7वीं बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर भी।
राज्य में पिछले कुछ दशकों से हर बार सत्ता विरोधी लहर के कारण सत्ता में परिवर्तन का ट्रेंड रहा है। ऐसे में सत्ता बचाने के लिए वीरभद्र को सत्ता विरोधी रुझान से पार पाना होगा। वह भी तब जब वह खुद और उनके परिवार के सदस्य भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं।
मोदी का करिश्मा भाजपा का हथियार
बीते लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में राज्य की सभी लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार भी पीएम को ही केंद्र में रख कर चुनाव लड़ेगी। वीरभद्र और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला पार्टी का मुख्य मुद्दा होगा।
पहले पार्टी की योजना स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर चुनाव मैदान में उतरने की थी। लेकिन, गुटबाजी शुरू होने की आशंका के कारण पार्टी ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है।
पार्टी नेतृत्व को डर है कि नड्डा को आगे करने की स्थिति में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार समर्थक गुट की ओर से परेशानी खड़ी की जा सकती है। ऐसे में ज्यादा संभावना चुनाव जीतने के बाद बतौर मुख्यमंत्री नड्डा का नाम घोषित होने की है।
चुनाव कार्यक्रम
नामांकन 16-23 अक्तूबर
नामांकन पत्र की जांच 24 अक्तूबर
नाम वापसी की आखिरी तारीख 26 अक्तूबर
मतदान 9 नवंबर
मतगणना 18 दिसंबर
हिमाचल प्रदेश विधानसभा
कुल सीटें: 68
पार्टी 2012 2007
कांग्रेस 36 23
भाजपा 27 41
एचएलपी 01 00
निर्दलीय व अन्य 05 04
अगले हफ्ते घोषित होगा गुजरात का कार्यक्रम
गुजरात विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अगले हफ्ते होने की संभावना है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक फिलहाल इस सूबे की चुनावी तैयारियों की अंतिम समीक्षा नहीं हुई है।
इसी कारण चुनाव कार्यक्रम की घोषणा टाल दी गई। माना जा रहा है कि गुजरात में दिसंबर के दूसरे हफ्ते में दो चरणों में मतदान कराए जाएंगे।