‘जब इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू ही नहीं करनी थी, तो लोगों के टैक्स के 1400 करोड़ खर्च कर नया एयरपोर्ट बनाया ही क्यों? गरीबों की जमीन भी छीनी और उन्हें भटकने के लिए छोड़ दिया गया। सरकार को इसका पछतावा नहीं है कि उसने लोगों के टैक्स की 1400 करोड़ की रकम बर्बाद कर दी।
अगर सरकार की नीयत चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट को चलाने की नहीं है तो वह इसके लिए ली गई गरीब किसानों को जमीन उन्हें वापस कर दे।’ यह तल्ख टिप्पणी सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस गुरमीत राम की खंडपीठ ने उस समय की, जब चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू किए की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि चंडीगढ़ से इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू करने का जिम्मा केंद्र का नहीं बल्कि चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी लिमिटेड का है।
इस पर बेंच ने केंद्र सरकार के वकील को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि अब वे एफिडेविट दाखिल करें कि केंद्र सरकार की इस मामले में कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। बेंच ने स्थानीय फ्लाइट आपरेटरों को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर सुनवाई 10 मई तक स्थगित कर दी।
केंद्र सरकार के वकील ने अदालत से कहा कि चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एमिग्रेशन जैसी सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत केंद्र सरकार पर भरोसा रखे क्योंकि सरकार इस मामले पर गंभीर है। इस पर बेंच ने कहा कि केंद्र इस मामले पर न तो गंभीर है और न ही संवेदनशील, बल्कि इस मामले में बार-बार झूठ बोला जा रहा है। दोनों जजों की खंडपीठ ने आगे कहा कि वे इस पूरे मामले से बहुत आहत हैं और केंद्र सरकार से हाथ जोड़कर कहना चाहते हैं कि इस एयरपोर्ट को बंद ही कर दो और 320 ग्रामीणों की जमीन लौटा दें ताकि वे अपनी जमीन का उपयोग कर सकें।
खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट और इस क्षेत्र के लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा है। इस मामले की सीबीआई जांच जरूरी लग रही है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट से अब तक इंटरनेशनल फ्लाइट्स शुरू नहीं किया जाना चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा के लोगों से धोखा है। उपयुक्त होगा कि चंडीगढ़ के पुराने एयरपोर्ट से ही फ्लाइट्स रन करें और इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए ली गई जमीन किसानों को वापस कर दी जाए। अदालत का कड़ा रुख देखते हुए केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि दुबई के लिए चंडीगढ़ से फ्लाइट की बात की जा रही है और कुछ अन्य कंपनियों से भी बात चल रही है।
सात विमानन कंपनियों को नोटिस जारी: अदालत ने चंडीगढ़ में कार्यरत विमानन आपरेटरों गो एयर, एयर इंडिया, एयर एशिया, इंडिगो, स्पाइस जेट, जेट एयरवेज, एयर विस्तारा को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या वे घरेलू उड़ानों के साथ-साथ विदेशी उड़ानों में रुचि रखते हैं। अदालत ने इसके साथ ही इंटरनेशनल उड़ानों में रुचि दिखा रहीं दो एयरलाइंस से टाइम टेबल देने को कहा है ताकि चंडीगढ़ हवाई अड्डे से उड़ानों का समय निर्धारित किया जा सके।
हमें दे दो एयरपोर्ट : पंजाब: सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर बहस के दौरान माहौल काफी गरम था। खंडपीठ के दोनों जजों के कड़े रुख पर केंद्र सरकार के वकील स्थिति संभालने का प्रयास करते रहे। खंडपीठ ने जहां एयरपोर्ट बंद कर जमीन किसानों को लौटा देने की बात तक कह दी, वहीं पंजाब सरकार के वकील ने याचिका पर बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार इस एयरपोर्ट को नहीं चला सकती तो इसे पंजाब सरकार को दे दिया जाए। राज्य सरकार इस एयरपोर्ट को चलाने के लिए तैयार है।