जोधपुर शहर के प्राचीन जलाशयों व मंदिरों की दुर्दशा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। हाईकोर्ट ने दो दिन में देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त को विभाग के अधीन आने वाले मंदिरों में होने वाली आय और खर्च का हिसाब लेकर आने के आदेश दिए हैं। स्वप्रेरणा से दायर जनहित याचिका की सुनवाई में राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायाधीश विनीत माथुर ने आवश्यक निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने पूछा है कि चढ़ावे, मंदिर परिसरों में स्थित दुकानों के किराए से होने वाली आय को कहां खर्च किया जाता है। याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता मगराज सिंघवी, मनोज भंडारी ने कहा कि शहर के मंदिरों में चढ़ावे का कोई हिसाब—किताब नहीं है। वहीं, मंदिर परिसर में बनी दुकानों का वर्तमान दर से लाखों रुपए मासिक किराया होता है वह केवल बीस से पचास रुपए किराए पर बोल रही हैं। मंदिरों की आय का खर्च कहां और कैसे किया जा रहा है इसका भी स्पष्ट रूप से पता नहीं है।
उन्होंने फतेह सागर तालाब, नया तालाब और गुलाब सागर की दुर्दशा की भी शिकायत की। इस पर हाईकोर्ट ने निगम को फटकार लगाते हुए एएजी राजेश पंवार और केएल ठाकुर से 9 मार्च को जवाब पेश करने के आदेश दिए।