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खिले हैं रंग-बिरंगे फूल, फैली है हरियाली और बुग्याल

Wed, 20 Jul 2016 09:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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प्रकृति की नेमतों को संजोए मद्महेश्वर घाटी का मनणी बुग्याल। - फोटो : Amar Ujala
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जहां तक नजर दौड़ती है, रंग-बिरंगे फूल और चारों तरफ फैली हरियाली के बीच हल्के ढलान के बुग्याल फैले दिखते हैं। बुग्यालों की ढलानों पर मीलों तक खिले ब्रह्मकमल सहित कई दुर्लभ प्रजाति के फूल मानों प्रकृति का श्रृंगार कर रहे हों। यह नजारा ऊखीमठ से करीब 40 किमी दूर मनणी बुग्याल का है।
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रांसी से मनणी तक प्रतिवर्ष सावन के पहले सप्ताह में मनणा माई की जात में यहां श्रद्धालु पहुंचते हैं। बावजूद आज भी पर्यटन की अपार संभावनाओं को संजोए यह क्षेत्र गुमनाम है।

विकासखंड ऊखीमठ के मद्महेश्वर घाटी में मध्य हिमालय में स्थित मनणी बुग्याल पर्यटकों की नजरों से ओझल है। प्रकृति की सुंदर नेमतों को लिए यह क्षेत्र यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है। ट्रेकिंग के शौकीन जेएस रौतेला बताते हैं मनणी बुग्याल अपने आप में फूलों की घाटी है। सावन में यहां छोटे-छोटे बुग्यालों में लाल, पीले, गुलाबी, नीले फूल इस तरह से खिले रहते हैं, मानों किसी ने कतारबद्ध रखा हो।
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अगर शासन, प्रशासन और पर्यटन विभाग पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करें तो 40 किमी का यह ट्रैक देश-विदेश के पर्यटकों के लिए बेहतर टूरिस्ट डेस्टीनेशन साबित हो सकता है। रांसी से झिंड, सनियारा, कंडरा, पट्टुड़ी, दोफूंद, धौलीधार, द्वारी, कुलवाणी और डोबरा होते हुए मनणी बुग्याल पहुंचा जाता है।

इस पूरे ट्रेक पर प्रकृति ने अपने नेमतें बख्शी हैं। रांसी के वन पंचायत सरपंच कुंवर सिंह, देवेंद्र सिंह, चंद्र सिंह आदि का कहना है कि उत्तराखंड राज्य बनने के 16 वर्ष बाद भी प्रदेश सरकारें पर्यटन का खाका तैयार नहीं कर पाई हैं।
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जनपद के रमणीक स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए योजना तैयार की जा रही है। मनणी बुग्याल को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं आया है।
- पीके गौतम, जिला पर्यटन अधिकारी, रुद्रप्रयाग
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