जमीदार घराने में जन्म हुआ, बचपन में अक्सर ग्रैंड फादर के साथ खेतों में घूमने जाता था। धीरे धीरे मिट्टी और नेचर से प्यार हुआ। 58 वर्ष बीत चुके हैं अब तो इनकी आदत सी हो गई है।
सिंचाई के बाद जब इन पौधों और फूलों पर धूप की सुनहरी किरणें पड़ती हैं, तो गार्डन में लगे झूले पर बैठकर चाय की चुस्की के साथ ताजगी महसूस करता हूं। बिना इनकी सिंचाई किए घर से बाहर नहीं निकलता।
यह कहना है पंचकूला सेक्टर 12 के रहने वाले कैप्टन संजय आनंद का। कैप्टन बताते है कि मिट्टी से यह शरीर बना है, पौधे मिट्टी की ही देन हैं। अगर आप मिट्टी से वाकई प्यार करते हैं तो इन पौधों से प्यार करना सीख जाएंगे।
वह बताते हैं कि प्लॉट लेते समय गार्डन के लिए अलग से जगह ली थी। ताकि प्रापर तरीके से गार्डनिंग की जा सके। यहीं नहीं कैप्टन ने दिल्ली और देहरादून में अपने घर के बाहर भी गार्डन बनाया है।
1996 में पंचकूला में उन्होंने घर बनाया था, तब से यहां पर गार्डनिंग कर रहे हैं। उनके गार्डन में करीब 500 पौधे हैं। कैप्टन ने अपने गार्डन के एक हिस्से में छोटा किचन गार्डन भी बनाया है। जिसमें फल और सब्जी लगी हैं। वह अपने गार्डन में सुबह करीब एक घंटा और शाम को पांच से सात बजे तक पौधों की देखरेख करते हैं।
पत्नी ने डिजाइन किया गार्डन का इंटीरियर
गार्डन का इंटीरियर कैप्टन संजय आनंद की पत्नी सुनीता आनंद ने डिजाइन किया है। ये इंटीरियर इतनी खूबसूरती के साथ डिजाइन किया गया है कि गार्डन में बैठने वालों को लगता है कि वह नेचर के बिल्कुल करीब हैं।
सुनीता आनंद ने गार्डन में मटके का झरना बनाया है और सात तरह की सोलर लाइट से गार्डन को सजाया है। अंधेरा होने के बाद ये लाइटें जब पौधों पर पड़ती हैं तो इनकी खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा मिट्टी से बने घोड़े, घंटियां भी खूबसूरती के रंग बिखरती हैं। सुनीता आनंद ने बेहतर गमलों का चुनाव किया है।
गार्डन में लगे कुछ खास पौधे
पापी, क्रोटन, बोगन विलिया, आठ तरह के कैक्टस, पाम, अशोक, पेंजी, पत्थर चट्ट, सहित अन्य पौधे हैं।
किचन गार्डन में लगी सब्जियां
मैक्सिकन मिर्च, घीया, तोरी, टमाटर, करेला, प्याज, चिकू, अमरूद, आम, ऑरेंज, नींबू।