सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ की लगातार सूचनाओं और अक्सर सीजफायर के उल्लंघन के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। तारबंदी आगे बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव से किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, पर अब ऐसा होता भी नहीं दिख रहा।
सीमा पर तारबंदी और बांध को अपनी मौजूदा जगह से आगे ले जाने के प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम ने फिलहाल टाल दिया है। दो दिन पहले अंतरराष्ट्रीय सीमा पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम ने दौरा कर तारबंदी को आगे करने के प्रस्ताव पर गौर किया था।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम ने केंद्र को दी रिपोर्ट में फिलहाल तारबंदी की मौजूदा लोकेशन नहीं बदलने का सुझाव दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों की काफी समय से मांग थी कि तारबंदी और छोटे-छोटे बांधों को मौजूदा जगह से आगे ले जाया जाए। करीब 20 हजार एकड़ जमीन तारबंदी के उस पार है, जो भारतीय क्षेत्र में है। वर्ष 2009 से सीमा पर बाड़ लगाने का काम शुरू किया गया था।
लगातार सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं होने के कारण केंद्रीय सुरक्षा बलों ने जीरो लाइन से कई फीट अंदर आकर तारबंदी की। हालात ठीक होने पर किसान तारबंदी के आगे जाकर अपने खेतों में खेतीबाड़ी करते रहे।
पर पिछले कई साल से सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं में बहुत वृद्धि होने और इसमें क्रइ लोगों की जान जाने के चलते अब किसानों के लिए तारबंदी के आगे की जमीन में खेतीबाड़ी करना बेहद मुश्किल हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम ने भी मौजूदा परिस्थितियां व हालात को तारबंदी आगे ले जाने के लिए सही नहीं बताया है।