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सोलर प्लांट के लिए काटे गए पेड़ों में गोलमाल

Sun, 14 May 2017 11:15 AM IST
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
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सोलर प्लांट लगाने के लिए काटे गए पेड़ों के हिसाब किताब में गोलमाल हुआ है। इन पेड़ों की बिक्री से मिली धनराशि पर यूजेवीएनएल अफसर भी अब संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं।
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उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ने खोदरी और ढकरानी हाइड्रो प्रोजेक्ट के आसपास खाली पड़ी निगम की जमीन पर सोलर प्लांट लगाए। ढकरानी में वन विभाग से अनुमति लेकर शीशम, यूकेलिप्टस, चकसेरिया, जकरेंडा जैसे करीब 150 से अधिक पेड़ों का कटान किया गया।

पेड़ों का कटान तो हो गया, लेकिन इन पेड़ों की बिक्री से मिली धनराशि का कोई हिसाब किताब यूजेवीएनएल अफसर नहीं दे रहे हैं। मौखिक रूप से जानकारी न दिए जाने पर ऊर्जा कामगार संगठन के प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष दीपक बेनीवाल ने आरटीआई के तहत इसकी सूचना मांगी। लेकिन, इसमें भी यूजेवीएनएल ने बिक्री से मिली राशि की जानकारी नहीं दी। 
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उधर, उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष राकेश शर्मा का कहना है कि सोलर प्लांट लगाने के नाम पर बड़ा स्कैम हो रहा है। काटे गए बेशकीमती पेड़ों की बिक्री से मिले लाखों रुपये भी खुदबुर्द किए जा रहे हैं।

आरटीआई में इसकी सूचना नहीं दी जा रही है। संगठन अब इसके खिलाफ अपील में अपील में जाएगा। साथ ही सोलर प्लांट संबंधी पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग पर संगठन अब भी अडिग है।

यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा ने बताया कि सोलर प्लांट लगाने के लिए कुछ पेड़ों का कटान हुआ है। जबकि ज्यादा संख्या में छोटे पौधे थे। जितने पेड़ काटे गए उसके बदले नियमानुसार, दूसरी जगह पर उतने ही पौधे लगाए गए हैं। निगम ने वहां बहुत ही शानदार बगीचा भी तैयार किया है। पेड़ों की बिक्री की धनराशि के मामले को दिखाएंगे। 
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