वर्ष 2016 में सर्वोच्च न्यायालय में अपील खारिज होने के बाद विजिलेंस टीम ऊना निवासी कटवाल को गिरफ्तार करने उसके घर पहुंची, लेकिन तब वह फरार हो गया। इसके बाद कोर्ट ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर उसके विदेश भागने पर रोक लगा दी थी।
बार-बार नोटिस के बावजूद आत्मसमर्पण न करने और फरार रहने पर कोर्ट ने उसे भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया। इसके साथ ही पूर्व आईएएस अधिकारी की चल-अचल संपत्ति जब्त करने के आदेश न्यायालय ने पारित किए।
बताया जा रहा है कि अभी कटवाल की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई शुरू ही हुई थी कि उसे विजिलेंस ने ऊना से धर दबोचा। इस मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक वीके चौधरी ने बताया कि विजिलेंस टीम ने कटवाल को ऊना से गिरफ्तार कर लिया है।
एसएम कटवाल के कार्यकाल में बोर्ड के माध्यम से वर्ष 2001-02 में सरकारी पदों पर भर्तियां हुई थीं। प्रदेश में भाजपा की सरकार के रहते चयन बोर्ड के माध्यम से हुई इन भर्तियों में धांधली के आरोप लगे थे।
वर्ष 2004 में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस भर्ती फर्जीवाड़े के मामले में जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की और चालान कोर्ट में पेश किया।
आरोप साबित होने पर हमीरपुर सत्र न्यायालय ने चयन बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन कटवाल और चयन बोर्ड के सदस्य डॉ. विद्या नाथ, दो सरकारी स्कूल के अध्यापकों राकेश छाबड़ा और मदन गोपाल को इस मामले में सजा सुनाई थी।
सभी हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने भ्रष्टाचार समेत अन्य धाराएं हटाते हुए एक-एक साल का कारावास और पांच-पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई। फिर इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की गई। हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने अपील खारिज कर दी।
सर्वोच्च न्यायालय में अपील खारिज होने के बाद चयन बोर्ड के सदस्य डॉ. विद्या नाथ और दो सरकारी स्कूल के अध्यापकों को विजिलेंस ने गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें बाद में जेल भेज दिया गया। इन तीनों दोषियों की सजा पूरी हो गई है, जबकि पूर्व आईएएस अधिकारी कटवाल फरार हो गया था।