विलाप करती सुहेल की मां और उसकी बहन।
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जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित नालवा गांव में एक बार फिर आदमखोर तेंदुए ने एक परिवार के चश्मो-चिराग को निवाला बना लिया। तेंदुए का शिकार हुआ बारह वर्षीय सुहेल तीन बहनों का इकलौता भाई था। वही अपने माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी था।
मूल रूप से भरत के रहने वाले गुलाम मोहम्मद की बदनसीबी ने अब तक साथ नहीं छोड़ा। करीब पंद्रह साल पहले आतंकवाद से त्रस्त होकर अपना गांव छोड़कर नालवा में आकर बस गया। परंतु यहां आदमखोर तेंदुए ने परिवार की खुशियां छीन ली। वर्तमान में गुलाम मोहम्मद अपनी पत्नी और चार बच्चों को छोड़ कर शिमला मजदूरी करने गया हुआ था।
छठी कक्षा में पढ़ने वाला बेटा सुहेल ट्यूशन पढ़ने गया हुआ था। लेकिन शुक्रवार की शाम उसकी जिंदगी की आखिरी शाम साबित हुई। घर के पास ही आदमखोर तेंदुए ने उसको अपना शिकार बना लिया। शनिवार की सुबह खेतों में बिखरे उसके शव के टुकड़ों को देखकर पूरे गांव के लोगों की आंखें नम हो गई।
उधर उसकी मां का रो-रोकर बेसुध हो रही थी। वह बार-बार कह रही थी कि अब वह अपने पति को कैसे मुंह दिखाएगी। सुहेल तीन छोटी बहनों तौइबा (9), अतीबा (4) और अतूबा (18 माह) को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर घर में हो क्या गया? घर पर इतनी भीड़ क्यों लगी है?
पीड़ित परिवार की मिली आर्थिक मदद
घटना की जानकारी मिलने के बाद डीसी भूपिंद्र कुमार और एएसपी विनय कुमार ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने तत्काल प्रशासन की ओर से पांच हजार रुपये की मदद दी। वहीं वाइल्ड लाइफ विभाग की तरफ से 25 हजार रुपये की सहायता दी गई। डीसी ने भरोसा दिया कि परिवार को तीन लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।