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उत्तराखंड सरकार के निर्देश पर टीडीसी के दस अफसरों पर केस

Sat, 08 Jul 2017 02:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंतनगर
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trivendra singh rawat
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उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कारपोरेशन (टीडीसी) के 10 अधिकारियों के खिलाफ संस्था को घाटे में पहुंचाने, सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी करने की रिपोर्ट पंतनगर थाने में दर्ज कराई गई है। आरोपी अधिकारियों पर टीडीसी को 16 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
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अधिकारियों के खिलाफ शासन स्तर पर हुई जांच के बाद सरकार के निर्देश पर उप मुख्य कार्मिक अधिकारी सीके सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। तहरीर में टीडीसी के पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ.पीएस बिष्ट, कंपनी सचिव आरके निगम, मुख्य अभियंता पीके चौहान, मुख्य बीज उत्पादन अधिकारी डॉ.दीपक पांडे, उप मुख्य वित्तीय अधिकारी बीडी तिवारी, लेखाधिकारी अतुल पांडे, उप मुख्य विपणन अधिकारी अजीत सिंह, एके लोहनी, प्रशासनिक अधिकारी शिवमंगल त्रिपाठी, लेखाकार जीसी तिवारी को आरोपी बनाया गया है। इनके खिलाफ धारा 409 और 420 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

आरोपी अधिकारियों में से पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ.पीएस बिष्ट पंतनगर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। वह टीडीसी में प्रतिनियुक्ति पर बतौर प्रबंध निदेशक कार्यरत रहे थे। 
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मुख्य अभियंता पीके चौहान को 30 जून को सेवानिवृत्ति से चार दिन पूर्व शासन ने निलंबित कर दिया था। उप मुख्य विपणन अधिकारी एके लोहनी और प्रशासनिक अधिकारी शिवमंगल त्रिपाठी भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि लेखाधिकारी अतुल पांडे का देहांत हो चुका है।
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हरीश रावत ने दिए थे जांच के आदेश

harish rawat
वर्ष 2015-16 में गेहूं का बीज समय पर न बिकने के कारण टीडीसी को लगभग 16 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। घाटे का कारण बिना किसी योजना के बीज का अधिक उत्पादन करना और वितरकों को लाभ पहुंचाना बताया गया था। 

उस समय टीडीसी के चेयरमैन डॉ. हरक सिंह रावत और प्रबंध निदेशक डॉ.पीएस बिष्ट थे। किसानों द्वारा जांच के लिए टीडीसी मुख्यालय पर किए गए धरना, प्रदर्शन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर घाटे की जांच के लिए शासन स्तर पर चार सदस्यीय समिति गठित की गई थी। 

अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति में पुलिस महानिदेशक बीएस मर्तोलिया, अपर मुख्य सचिव कार्मिक सुनील श्रीपात्री, कृषि निदेशक गौरीशंकर आर्या को शामिल किया गया था। चार सदस्यीय समिति ने मामले की जांच कर बीती 28 जून का रिपोर्ट शासन का सौंप दी थी। 

जांच रिपोर्ट में 10 अधिकारी घाटे के दोषी पाए गए थे। प्रदेश के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने तीन जुलाई को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर प्रबंध निदेशक को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश जारी किए।
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